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डाटा प्रोटेक्शन कमेटी की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डाटा प्रोटेक्शन पर जस्टिस श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट को सोमवार को रिकॉर्ड पर लेने से इन्कार कर दिया। आधार की वैधानिकता पर सुनवाई के दौरान डाटा प्रोटेक्शन के पुख्ता इंतजाम करने और इस संबंध में कानून बनाने के सुझाव पर सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में डाटा प्रोटेक्शन कमेटी का गठन किया था।
इस कमेटी ने शुक्रवार को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की संविधानपीठ मई में ही आधार कानून की वैधानिकता पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख चुकी है। आधार पर अब किसी भी दिन फैसला आ सकता है।
सोमवार को केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष डाटा प्रोटेक्शन कमेटी की रिपोर्ट आने का जिक्र किया। उन्होंने कोर्ट से रिपोर्ट पेश करने के बारे में पूछा। लेकिन प्रधान न्यायाधीश ने दोनों साथी न्यायाधीशों से मशविरा करने के बाद कहा कि वह रिपोर्ट दाखिल न करें। इस पर वेणुगोपाल ने कहा, जैसी कोर्ट की इच्छा। सुप्रीम कोर्ट की जिन पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ ने आधार की वैधानिकता पर फैसला सुरक्षित किया है, उनमें से तीन इस पीठ में शामिल थे।
आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं में डाटा कलेक्शन को निजता के अधिकार का हनन बताने के साथ ही डाटा प्रोटेक्शन का मुद्दा उठाया गया है। सुनवाई के दौरान ही सरकार ने डाटा प्रोटेक्शन के पुख्ता इंतजाम और एकत्रित डाटा के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया था। साथ ही सरकार ने डाटा प्रोटेक्शन पर कानून बनाने के सुझाव के लिए जस्टिस श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में डाटा प्रोटेक्शन कमेटी का गठन किया था।
एथिकल हैकरों द्वारा ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा का आधार डाटा हैक कर लिए जाने और उनके बारे मे सूचनाएं सार्वजनिक करने के दावे की खबरों को देखते हुए डाटा प्रोटेक्शन कमेटी की रिपोर्ट अहम हो जाती है। साथ ही आधार की वैधानिकता पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें लगी हैं।
हालांकि यूआइडीएआइ ने आरएस शर्मा के बारे में सार्वजनिक की गई जानकारियां आधार के डाटाबेस या सर्वर से लिए जाने का खंडन किया है। उसका कहना है कि सार्वजनिक की गई सूचनाएं पहले से ही गूगल व अन्य वेबसाइट्स पर उपलब्ध हैं।
अतिरिक्त सूत्रों का भी कहना है कि हैकरों की इस कार्रवाई से आधार के कोर बायोमैट्रिक डाटा में सेंध नहीं लगी है। हैकरों की तरफ से जिस तरह की जानकारी दी गई है वे किसी न किसी रूप में अन्यत्र उपलब्ध हैं।
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