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नए-पुराने सभी शस्त्र लाइसेंसधारकों का बनेगा डाटाबेस

नई दिल्ली। अप्रैल 2019 से नए और पुराने सभी तरह के शस्त्र लाइसेंसधारकों को एक डाटाबेस में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन्हें एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआइएन) भी दी जाएगी। गृह मंत्रालय ने बताया कि इसका उद्देश्य आपराधिक गतिविधियों सहित हर्ष फायरिग जैसे मामलों में संलिप्त अधिकृत निजी शस्त्र लाइसेंसधारकों पर रोक लगाना है।
शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक शस्त्र लाइसेंस देने वाली और उनका नवीनीकरण करने वाले प्राधिकरण को डाटाबेस में शस्त्र लाइसेंस धारक का डाटा भरना होगा। जिससे एक विशिष्ट पहचान संख्या बनेगी। एक अप्रैल, 2019 से बिना यूआइएन वाले शस्त्र को अवैध माना जाएगा। वहीं, एक अप्रैल या उससे पहले एक से अधिक लाइसेंस रखने वालों को फार्म-3 भरकर लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकारी को उसके यूआइएन के मुताबिक प्रार्थनापत्र देना होगा और उससे अपने कई शस्त्रों के बदले एक लाइसेंस देने को कहना होगा।
गौरतलब है कि शस्त्र अधिनियम-1959 के सेक्शन-44 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करके शस्त्र अधिनियम नियम-2016 में परिवर्तन किया जाएगा। इसे शस्त्र अधिनियम 2018 कहा जाएगा। गृह मंत्रालय के मुताबिक संशोधित अधिनियम के तहत किसी भी ऐसे व्यक्ति को शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी, जिसका कोई प्रमाणिक दस्तावेज नहीं होगा।
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