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विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को मोदी सरकार बनाएगी हथियार

नई दिल्ली। विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव अब सरकार के लिए केवल जीत का सवाल नहीं बल्कि इतनी बड़ी जीत का है कि विपक्ष नैतिक तौर पर हार मानने को मजबूर हो। हालांकि अभी भी कुछ दलों ने पत्ते नहीं खोले हैं और किसी के पक्ष में वोट देने या इससे दूर रहने का फैसला आखिरी वक्त पर लेंगे। बीजद, अन्नाद्रमुक, टीआरएस की ओर से भी कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई। लेकिन भाजपा दो-तिहाई बहुमत की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में इसका खाका तैयार हुआ और पार्टी के विभिन्न नेता अलग-अलग दलों से बात कर यह सुनिश्चित करने में लगे रहे कि राजग से बाहर खड़े दल भी वोटिंग के वक्त सरकार के साथ रहें।
दरअसल, सरकार विपक्ष के लाए अविश्वास प्रस्ताव को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाना चाहती है। कुछ उसी लिहाज से भाजपा के प्रतिनिधि कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों पर हमला भी करेंगे। इसमें तुष्टीकरण, सांप्रदायिकता, गरीबोन्मुखी योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी जैसे मुद्दे शामिल होंगे। चर्चा के दौरान सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई जाएंगी। सरकार की जीत में कोई संशय नहीं है। लेकिन इसे बड़ी जीत बनाने और यह जताने की कोशिश होगी कि राजग और भावी राजग के सामने विपक्षी महागठबंधन की राजनीतिक हैसियत नहीं है।
भाजपा के सात-आठ वक्ता होंगे
अपना संख्या बल बनाए रखने को भाजपा जहां बुधवार से ही अपने सांसदों की राज्यवार बैठक कर रही थी, वहीं बहस के दौरान विपक्ष को करारा जवाब देने के लिए वक्ताओं की सूची कुछ इस तरह तैयार की गई है कि सभी अहम राज्यों का प्रतिनिधित्व दिखे। सूत्र बताते हैं कि भाजपा की ओर से कम से कम सात-आठ वक्ता होंगे। यह राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे चुनावी राज्यों से भी होंगे। और गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह मस्त जैसे बड़े नाम भी शामिल होंगे।
अन्नाद्रमुक आ सकता है साथ
सूत्रों की मानें तो अन्नाद्रमुक को साथ जोड़ा गया है। उसके 37 सांसद अगर समर्थन में वोट देते हैं तो आंकड़ा 350 के पार जा सकता है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने इसका संकेत भी दे दिया। उन्होंने कहा-"सोनिया जी का गणित कमजोर है। पहले भी एक बार उन्होंने 272 का दावा किया था लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। बाद में राजग सरकार को जरूर 300 से ज्यादा वोट मिले थे। बीस साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा। हमें सुदूर दक्षिण, दक्षिण और पूर्व से भी समर्थन मिलेगा और लोग भौंचक होंगे।" उन्होंने दलों के नाम नहीं बताए लेकिन माना जा रहा है कि अन्नाद्रमुक से समर्थन का संकेत मिल गया है।
बीजद व टीआरएस वोटिंग से दूर! 
गुरुवार देर शाम तक की स्थिति में माना जा रहा है कि बीजद और टीआरएस वोटिंग से दूर रहेंगे। जबकि शिवसेना ने थोड़े असमंजस के बाद समर्थन की घोषणा कर दी है। शिवसेना के रुख पर असमंजस इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि पार्टी ने पहले तो सांसदों को व्हिप जारी कर सरकार को समर्थन देने की बात की लेकिन उनके सांसद यह जताते रहे कि शुक्रवार को शाम तक पार्टी आलाकमान से संदेश आने के बाद ही फैसला लिया जाएगा। लेकिन देर शाम मुंबई से समर्थन की घोषणा कर दी गई। बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से बात की थी।
"शत्रु" भी सरकार को वोट देंगे
भाजपा से नाराज चल रहे शत्रुघ्न सिन्हा और सावित्री फुले भी सरकार के लिए वोट डालेंगे। दरअसल पार्टी वे व्हिप जारी किया है कि इसका उल्लंघन करने पर सदस्यता जा सकती है। कीर्ति आजाद विदेश में हैं और इसलिए वोटिंग के लिए मौजूद नहीं होंगे। भाजपा यह भी सुनिश्चित करेगी कि वलसाड और रामपुर के अस्वस्थ सांसद केसी पटेल को भी डॉक्टरों की निगरानी में सदन लाया जाएगा।
राजग के बड़े दायरे का संकेत
कुछ दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने एक साक्षात्कार में राजग के बड़े दायरे का संकेत दिया था। अविश्वास प्रस्ताव पर अगर अन्नाद्रमुक साथ खड़ी नजर आई तो सुदूर दक्षिण के लिए यह संकेत होगा। वहीं स्वाभिमान पक्ष, पीएमके जैसे छोटे दलों को भी साथ खड़ा किया जाएगा। यह महागठबंधन का जवाब होगा।
"मैं इतना चाहता हूं कि विपक्ष अपनी बात कहकर भाग न जाए। अगर प्रस्ताव लाये हैं तो आखिर तक रुकें और उसे अंतिम परिणति तक पहुंचाएं। नतीजा देखकर जाएं।" 
-अनंत कुमार, संसदीय कार्यमंत्री
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