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चंद्रग्रहण : तस्‍वीरों में देखिए देश के विभिन्‍न शहरों में कैसा नज़र आया चांद

नई दिल्ली। 104 साल बाद 27 जुलाई यानी शुक्रवार रात को सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण देखा गया। गुरु पूर्णिमा की रात पड़ने वाला साल का यह दूसरा ग्रहण देशभर में दिखाई दिया। इसकी अवधि करीब 3 घंटे 55 मिनट की रही। चंद्रग्रहण के अवसर पर वाराणसी के दशाश्‍वमेध घाट पर गंगा नदी में ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और विशेष स्‍नान किया।
रात 3.49 बजे तक 03.54 घंटे रहा चंद्रग्रहण
चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना तो आधी रात से शुरू होगी। इससे पहले शाम ढलते ही लाल ग्रह पूरब दिशा में अनूठी चमक बिखेरते हुए उदय हो रहा होगा। इसके बाद पूर्ण खिला हुआ चांद नजर आएगा
इस बीच खास बात यह होगी कि आसमानी आतिशबाजी के रूप में जलती हुई चमकदार उल्काएं आसमान से धरती की ओर गिरने लगेंगी। जिन्हे सूर्यास्त के समय देखने की अधिक संभावना है।
वहीं पूर्ण ग्रहण के दौरान के अलावा सूर्योदय से पहले देखे जाने की संभावना है। इस बीच मंगल व चंद्रमा एक दूसरे के बेहद करीब नजर आएंगे।
इस तरह का खग्रास चंद्रग्रहण इससे पहले सन् 1914 में पड़ा था, जो भारत समेत कई अन्य देशों में देखा गया था। भारत में शुक्रवार रात 11.44 बजे से चंद्रग्रहण शुरू हुआ। रात करीब 1 बजे पूर्ण चंद्रग्रहण नजर आया। 1.15 बजे से 2.43 बजे तक ब्लड मून नज़र आया।
जानकारों के मुताबिक, चंद्रग्रहण को सामान्य तरीके से देखा जा सकता है और सूर्य ग्रहण की तरह इसमें आंखों को किसी तरह का नुकसान होने की आशंका नहीं रहती है। भारत को लेकर कहा जा रहा है कि पूरे देश में इस खगोलीय घटना को स्पष्ट देखा गया।
नजरें मंगल पर
मंगल इन दिनों हमारे सर्वाधिक करीब आ पहुंचा है। यह संयोग पिछले 60 हजार साल में दूसरी बार बनने जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2003 में मंगल हमारे सर्वाधिक नजदीक पहुंचा था।
आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ खगोलीय वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार यह तीनों घटनाएं खगोलीय दृष्टि से बेहद खास हैं। वहीं वैज्ञानिक नजरिए से मंगल ग्रह अध्ययन के लिए खास होगा। मंगल मिशन के लिए भावी योजनाओं के अलावा इन दिनों मंगल के वातावरण पर छाए धूल के गुबार का अध्ययन किए जाने में मदद मिलेगी।
इसलिए कहते हैं 'ब्लड मून'
पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है तो वह नाटकीय रूप से चमकीले नारंगी रंग से लाल रंग का हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में उसे 'ब्लड मून' कहा जाता है।
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