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बुराड़ी केस : पिता की आत्मा आती थी शरीर में, कहा था- बचा लेंगे भगवान

नई दिल्ली। बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में बहेद हैरान करने वाली बात सामने आई है। मरने वालों में शामिल ललित परिजनों से कहता था कि उसके शरीर में पिता की आत्मा आती है।
उनके बताए अनुसार ही शनिवार देर रात घर के सभी सदस्यों ने पहले पूजा अनुष्ठान किया था, हवन किया था फिर वट पूजा के लिए बरगद की तरह दस लोग छत पर लगे लोहे की ग्रिल से चुन्नी व साड़ियों के जरिये लटक गए थे।
सभी से कहा गया था कि वट पूजा से भगवान के दर्शन होते हैं। बरगद की जटाओं की तरह लटक कर पूजा करने से किसी की जान नहीं जाएगी। भगवान किसी को मरने नहीं देंगे। अंधविश्वास ने सभी की जान ले ली।
क्राइम ब्रांच को मृतकों के घर से मिले कुछ रजिस्टर से इस तरह की जानकारी मिली है। पुलिस को रजिस्टर में अलौकिक शक्तियां, मोक्ष के लिए मौत ही एक द्वार व आत्मा का अध्यात्म से रिश्ता जैसी अजीबोगरीब बातें लिखी मिलीं हैं।
रजिस्टर में लिखा हुआ है कि मोक्ष प्राप्त करना है तो जीवन को त्यागना होगा..। मौत को गले लगाने से कष्ट होगा। पुलिस का कहना है कि दस साल पहले ललित के पिता भोपाल दास भाटिया की मृत्यु हो गई थी। वह आर्मी में थे।
घोड़े से गिर जाने से उनके पैर की हड्डी टूट गई थी, जिससे सेवानिवृत्ति से पूर्व उन्होंने वीआरएस ले लिया था। ललित का परिवार वैसे तो कई पीढ़ियों से काफी धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है।
सभी धर्म कर्म व तंत्रमंत्र में विश्वास करते रहे हैं। पिता की मृत्यु के बाद उनका सबसे छोटा बेटा ललित कई महीने तक मौन व्रत था। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने दावा किया था कि उनके शरीर में पिता की आत्मा आती है।
वह कभी पूजा करने के दौरान पिता बन जाते थे और उनके अनुसार घर के सभी सदस्यों से बात करने लगते थे। घर के सभी सदस्यों को भी यह विश्वास हो गया था कि ललित के शरीर में पिता की आत्मा आती है।
पुलिस को जानकारी मिली है कि ललित 2013 यानी पिछले छह सालों से प्रतिदिन घर में रजिस्टर में सभी सदस्यों के दिनचर्या के बारे में लिख देता था कि किस सदस्य को पूरे दिन से रात तक क्या-क्या करना है।
ऐसे में माना जा रहा है कि घर के सभी सदस्य ललित की बातों को मानने थे और उनके द्वारा बताए रास्ते पर ही चलते थे।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि ग्रिल व रोशनदान के रॉड से लटके मिले सभी दस लोगों के शवों को जिस तरह के निर्देश दिए गए थे उसका सभी ने पालन किया था।
रजिस्टर में ये लिखी हुई मिली है कि आंखों में पट्टी अच्छे से बांधनी है। पट्टी इस तरह बांधे जिससे शून्य के अलावा कुछ नहीं दिखना चाहिए। बरगद की तरह लटकने के लिए रस्सी के तौर पर सूती साड़ी या चुन्नी का प्रयोग करना है।
सात दिनों तक लगातार पूजा करनी है। कोई घर में आ जाए तो अगले पूजा का दिन गुरुवार या रविवार को चुनिये। सभी की सोच एक जैसी होनी चाहिए।
आगे लिखा है कि हाथों की पट्टियां बच जाए तो उसे आंखों पर डबल कर लेना, मुंह की पट्टी को भी रूमाल से डबल कर लेना। जितनी दृढृता व श्रद्धा दिखाओगे उतना ही उचित फल मिलेगा।
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