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अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू, पुरी में 8 बजे खुलेंगे कपाट

अहमदाबाद/पुरी। आज का दिन भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए बेहद अहम है क्योंकि आज भगवान अपने भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलेंगे। पुरी के अलावा अहमदाबाद में आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है। पुरी में जहां मंदिर के कपाट 8 बजे खुलेंगे वहीं अहमदाबाद में रथयात्रा शुरू हो चुकी है। पुरी में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं।
इस सालाना रथयात्रा को लेकर मंदिर और पुलिस की ओर से कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। भारी संख्या में सुरक्षाबल के जवानों की भी तैनाती की गई है। अहमदाबाद में खुद मुख्यमंत्री ने झाड़ू बुहारकर रथयात्रा की शुरुआत की।
मंगल आरती में शामिल हुए शाह
रथयात्रा में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से हजारों लोग अहमदाबाद पहुंच चुके हैं। बता दें कि रथयात्रा से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जगन्नाथ मंदिर में हुई मंगल आरती में शामिल हुए।
सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बीमा
भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगरयात्रा पर निकलेंगे। भगवान की इस रथयात्रा में करीबन 2500 साधु-संत हिस्सा लेंगे। जानकारी के मुताबिक, रथयात्रा की सुरक्षा के लिए 1.5 करोड़ रुपये का बीमा भी लिया गया है। रथयात्रा के दौरान अगर कोई बड़ी जानहानि होती हे तो उसके लिए ये बीमा सुरक्षा रहेगा।
PM ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर देश को जगन्नाथ रथयात्रा की शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने कहा है कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से देश नई ऊंचाइयों पर पहुंचे।
वहीं, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी ट्वीट कर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
जानिए रोचक बातें
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया यानि 14 जुलाई 2018 (शनिवार) को रथ यात्रा शुरू हो रही है। रथ यात्रा मुख्य रूप से भगवान जगन्नाथ की होती है। जिसमें जगन्नाथ का 45 फीट ऊंचा रथ होती है। यह त्योहार पूरे 9 दिन तक जोश और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन दिनों भगवान जगन्नाथ का गुणगान किया जाता है। जो लोग रथ खींचने में सहयोग करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हिंदू धर्म में जगन्नाथपुरी का वर्णन स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में कई जगह किया गया है। जिसमें बताया गया है कि कई पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि के बीच विशाल रथों को सैकड़ों लोग मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं।
सबसे पहले भाई बलराम जी का रथ प्रस्थान करता है। इसके थोड़ी देर बाद बहन सुभद्रा जी का रथ चलना शुरू होता है। अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं। माना जाता है कि जो लोग इस दौरान एक दूसरे को सहयोग देते हुए रथ खींचते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, व सुभद्रा के रथ नारियल की लकड़ी से बनाए जाते है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि ये लकड़ी हल्की होती है। भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल और पीला होता है। इसके अलावा यह रथ बाकी रथों की तुलना में भी आकार में बड़ा होता है।
भगवान जगन्नाथ के रथ के घोड़ों का रंग सफेद, सुभद्रा के रथ के घोड़ों का रंग कॉफी व बलरामजी के रथ के घोड़ों का रंग नीला होता है। भगवान जगन्नाथ देव की रथ यात्रा के दिन बारिश जरूर होती है।
आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि इस दिन बारिश न हुई हो। माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ रस्ते में एक बार अपना पसंदीदा मिठाई पोड़ा पीठा खाने के लिए जरूर रुकते हैं।
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