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यूएन ने कहा, 2030 तक लक्ष्य पाने में भारत का योगदान रहेगा अहम

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देश 2030 तक 17 सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) में से केवल एक ही हासिल कर पाएंगे। यूएन इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पेसिफिक के पेसेफिक (यूएन ईएससीएपी) के उप कार्यकारी सचिव कावेह जाहिदी का कहना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करना काफी हद तक भारत के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत तय किए गए सतत विकास के लक्ष्यों में दुनियाभर के देशों को 2030 तक गरीबी, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुधार, शिक्षा और लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने हैं। जाहिदी के अनुसार, अभी जिस रफ्तार से प्रयास किए जा रहे हैं उससे हम केवल शिक्षा का लक्ष्य ही हासिल कर पाएंगे। यह अपने आप में बड़ी सफलता है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। भारत का योगदान इन सब में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होगा लेकिन यह सरकार के लक्ष्य और निवेश पर निर्भर करेगा।
असमानता और डिजिटल डिवाइड बड़ी समस्या
जाहिदी के अनुसार, असमानता और डिजिटल डिवाइड (इंटरनेट से जुड़े और नहीं जुड़े लोगों का अंतर) खत्म करने के लिए किए जा रहे प्रयास विपरीत दिशा में जा रहे हैं। असमानता केवल आय और संपत्ति में नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, आपदा के प्रभाव में भी देखी जा सकती है। ऐसे समय में जब लोग शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए मोबाइल पर निर्भर हो रहे हैं तो डिजिटल डिवाइड को कम करना जरूरी है।
स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में भी पीछे
खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन मुहैया करना अब भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बड़ी समस्या है। जाहिदी ने इस दिशा में भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, लोगों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने व अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के प्रयास रंग ला रहे हैं। भारत ने फ्रांस समेत करीब 60 देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर समझौता भी लांच किया है। भारत की तरह अन्य देशों को भी इस दिशा में अपने लक्ष्य तय करने होंगे।
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