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मालवा-निमाड़ के 13 में से आठ जिलों में पिछले साल से कम वर्षा

इंदौर । इस साल मानसून मालवा-निमाड़ के अधिकांश इलाकों से रूठा हुआ है। जुलाई बीतने को है और पांच जिलों को छोड़कर बारिश कहीं भी पिछले साल के आंकड़े को पार नहीं कर पाई है। जबकि पिछले साल भी औसत से कम बारिश दर्ज की गई थी। उज्जैन संभाग में उज्जैन, नीमच, देवास और शाजापुर में पिछले साल से अधिक बारिश हुई।
जबकि इंदौर संभाग में सिर्फ बुरहानपुर में पिछले साल की तुलना में आंकड़ा पार हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह अंतर 0.67 से लेकर 6 इंच तक है। सबसे ज्यादा अंतर छह इंच का झाबुआ में है। इंदौर में भी पिछले साल की तुलना में लगभग तीन इंच कम बारिश दर्ज की गई है।
कपास के पौधे सूखने लगे, इल्लियों का डर
झाबुआ में 15 दिन की लगातार खेंच से फसलों को लेकर चिंता बढ़ी है। एक हफ्ते और बारिश नहीं हुई तो दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। खरगोन के किसानों का दावा है कि कपास के 10 फीसदी पौधे सूखने लगे हैं। बाकी जगह बादल के कारण फसलों में इल्लियां या कीड़े लगने का डर सताने लगा है।
मप्र में बारिश गुजरात और छत्तीसगढ़ की ओर से आने वाले सिस्टम की वजह से होती है, लेकिन इस बार अभी तक गुजरात की ओर से कोई सिस्टम मप्र में प्रवेश नहीं कर पाया। बावजूद इसके अभी चिंता की बात नहीं है। खेती के लिए जिस तरह की बारिश चाहिए, वो अधिकांश इलाकों में हो रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में एक बार फिर मानसून सक्रिय होने की उम्मीद है। सिर्फ आलीराजपुर में सामान्य से कम बारिश हुई है। - वेदप्रकाश सिंह, वैज्ञानिक व रडार इंचार्ज, मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल
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