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झारखंड : खूंटी से अपहृत तीनों जवानों को पुलिस ने कराया मुक्त, हथियारों का पता नहीं

रांची। झारखंड में खूंटी के साइको थाना इलाके के पुटी गढ़ा गांव में ऑपरेशन चलाकर पुलिसकर्मियों ने अपहृत तीनो जवानों को शुक्रवार की सुबह मुक्त करवा लिया है। तीनों जवान मंगलवार को अगवा कर लिए गए थे। इन जवानों से लूटे गए चारों हथियारों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अपहृत तीनों जवान खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा के सुरक्षाकर्मी हैं। इनका अपहरण तब हुआ था, जब करीब 300 की संख्या में महिला पुरुष पत्थलगड़ी समर्थकों ने कड़िया मुंडा के आवास पर हमला किया था। आइजी ऑपरेशन आशीष बत्रा ने इसकी पुष्टि की है।
पत्थलगड़ी समर्थकों ने इस तरह किया था जवानों को अगवा - 
खूंटी में गत मंगलवार को पत्थलगड़ी समर्थक बेकाबू हो गए और सांसद कडि़या मुंडा के आवास पर हमला बोलते हुए तीन सुरक्षाकर्मियों का अपहरण कर लिया। उनके आवास से चार इंसास हथियार भी लूटते हुए लेकर चले गए। गनीमत था कि घटना के वक्त सांसद आवास में नहीं थे। घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार खूंटी जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर घाघरा में हो रहे पत्थलगड़ी को रोकने व उनके नेता युसूफ पूर्ति को गिरफ्तार करने के लिए करीब 500 जवान घाघरा जा रहे थे। घाघरा से चार किलोमीटर पहले ही अनिगड़ा में पत्थलगड़ी समर्थकों से पुलिस की भिड़ंत हो गई। पारंपरिक हथियार से लैस पत्थलगड़ी समर्थक जब हिंसा पर उतारू हो गए तो पुलिस ने भी लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इसमें एक पत्थलगड़ी समर्थक जख्मी हुआ, पुलिस ने आधा दर्जन पत्थलगड़ी समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई के बाद भागने के क्रम में पत्थलगड़ी समर्थकों ने अनिगड़ा के समीप चांदीडीह स्थित सांसद कडि़या मुंडा के आवास पर हमला बोल दिया। करीब 300 की संख्या में पत्थलगड़ी समर्थक महिला-पुरुषों ने सांसद आवास के हाउसगार्ड के चार इंसास को लूट लिया और एक हवलदार सहित चार जवानों को घसीटते हुए ले जाने लगे। इसी बीच, मौका पाकर हवलदार बैजू उरांव तो पत्थलगड़ी समर्थकों के कब्जे से भाग निकला, लेकिन तीन जवानों को पत्थलगड़ी समर्थकों ने बंधक बना लिया है। जो जवान बंधक बने हैं, उनमें सुबोध कुजूर, विनोद केरकेट्टा व सियोन सोरेन शामिल हैं।
जंगलों की खाक छानती और लाठी पटकती रही पुलिस - 
खूंटी पुलिस की टीम जिले के जंगलों-गांवों में अपहृत जवानों की तलाश में तीसरे दिन यानी गुरुवार को भी खाक छानती रही। घटना को गंभीरता से देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने खूंटी में दो अतिरिक्त एसपी, चार डीएसपी, 388 प्रशिक्षु दारोगा शामिल व 400 अतिरिक्त जवानों को तैनात कर दिया है। उधर, पत्थलगड़ी समर्थकों ने घाघरा में बुधवार को हुई पुलिस लाठीचार्ज की निंदा की और ग्रामीणों के साथ अड़की के कुरंगा व चलकद में बैठक कर ग्रामीणों को पुलिस के प्रति भड़काया। अपहृत तीनों जवानों की खोज में खूंटी पुलिस के अधिकारी व जवानों ने गुरुवार को खूंटी के उदबुरू, साके और घाघरा के आसपास के गांव में छापेमारी अभियान चलाया।
सारे मोस्ट वांटेड जमे हैं - 
कुरुंग व चलकद की बैठक में पत्थलगड़ी के स्वयंभू नेता युसूफ पूर्ति, जॉन जुनास तिड़ू और बलराम समद आदि लीड कर रहे थे। ग्रामीणों को यह समझाया गया कि घाघरा में पुलिस ने जो किया वह गलत है। पत्थलगड़ी समर्थकों पर सीधे लाठी चलाई गई। पुलिस ने ग्रामीणों के घर में लूटपाट की।
पत्थलगड़ी समर्थकों ने फिर ललकारा - 
पत्थलगड़ी समर्थकों ने ग्रामीणों को बताया कि घाघरा में ग्रामसभा ने वार्ता के लिए कई बार आग्रह किया। इसके बाद भी पुलिस ग्रामसभा में नहीं पहुंची। पुलिस ने ग्रामसभा की अवहेलना की, इसलिए ग्रामसभा अब पुलिस-प्रशासन के सभी कार्यों में बाधा उत्पन्न करने का काम करेगी। आने वाले दिनों में पुलिस-प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाने का निर्णय किया गया।
चारों तरफ पसरा खौफ - 
घाघरा की घटना के बाद कोचांग से कुरूंगा तक लोगों में खौफ देखा जा रहा है। हरेक को शक की निगाह से देखा जा रहा है। पुलिस की छापेमारी के डर से पुरुष गांवों में नजर नहीं आ रहे हैं। सिर्फ महिलाएं और बच्चे गांवों में हैं। पत्थलगड़ी समर्थक बीच जंगल में बैठकर अपनी योजना तैयार करने में लगे हुए हैं।
इसलिए यहां नहीं जाती है पुलिस - 
अड़की प्रखंड का कुरुंगा, कोचांग आदि क्षेत्र पत्थलगड़ी का प्रमुख क्षेत्र है। संभावना है कि तीनों सुरक्षाकर्मियों को कुरुंगा के जंगल में ही रखा गया है। कुरुंगा को पत्थलगड़ी की राजधानी कह सकते हैं। यह स्वयंभू नेताओं का सुरक्षित जोन माना जाता है। यहां पर पूर्व में पत्थलगड़ी की गई थी। पत्थलगड़ी के कारण कुरूंगा में पुलिस नहीं पहुंचती है। एक बार पुलिस ने वहां पर जाने की हिम्मत की थी तो उसे बंधक बनना पड़ा था। पुलिस को छुड़ाने गए एसपी-डीसी को भी काफी देर बंधक बनाया गया था, ऐसे में पुलिस वहां जाने से पहले फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है। सूत्रों की मानें तो इसी क्षेत्र में सांसद कड़िया मुंडा के अपहृत तीनों जवानों को रखा गया है। कहां किस घर में रखा गया है, यह पता नहीं चल रहा है। पुलिस इस क्षेत्र में छापेमारी नहीं चला रही है। कुरूंगा स्वयंभू नेता जॉन जुनास तिडू और बलराम समद का गांव है।
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