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विचाराधीन महिला कैदियों को जमानत दे सकती है सरकार

नई दिल्ली। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने उन विचाराधीन महिलाओं को जमानत देने की अनुशंसा की है, जो अपनी सजा का एक तिहाई समय जेल में गुजार चुकी हैं। यह सिफारिश 'वीमेन इन प्रिजन्स' शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में की गई है। महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इस रिपोर्ट को महिला कैदियों के लिए अहम बताया है।
इस रिपोर्ट में जेल में महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले कई मुद्दों को उठाया गया है। साथ ही इसमें विकलांग महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों पर भी बात की गई है। मंत्रालय ने ऐसी विचाराधीन महिला कैदियों को जमानत देने की सिफारिश की है जो उन्हें मिलने वाली अधिकतम सजा का एक तिहाई हिस्सा हिरासत में बिता चुकी हैं।
इस रिपोर्ट में सीआरपीसी की धारा 463-ए में कुछ जरूरी बदलाव करने के सुझाव दिए गए हैं, जिसमें आधी सजा काट लेने के बाद रिहाई का प्रावधान है। मंत्रालय ने यह सिफारिश गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को कैद से मुक्ति दिलाने के लिए की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सजायफ्ता महिलाओं अपने बच्चों के रहने की व्यवस्था करने की भी छूट का प्रस्ताव है। साथ इस तरह की व्यवस्था को पूरी करने के लिए सजा के निलंबन की भी सिफारिश की गई है। अब इस रिपोर्ट की सिफारिश को राज्यों के पास भेजने के लिए गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
ज्यादातर महिला कैदियों की उम्र 30-50 के बीच है। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न, हिंसा के मामलों के लिए और ज्यादा कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। मंत्रालय ने कुछ आंकड़े जारी करते हुए बताया कि 2015 के डेटा के अनुसार, भारतीय जेलों में चार लाख 19,623 कैदी बंद हैं, जिसमें 17,834 यानी लगभग 4.3 फीसद महिलाएं हैं।
इनमें से करीब 11,916 महिला विचाराधीन कैदी हैं। भारतीय जेलों के पांच सालों में किए जाने वाले विश्लेषण में कहा गया है कि महिला कैदियों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। 2000 में जहां महज 3.3 फीसदी थीं वह 2015 में 4.3 फीसदी हो गई हैं।
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