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अमरनाथ यात्रा के लिए किए गए हैं यह इंतजाम, सुरक्षा से स्वास्थ्य तक हर चीज का ख्याल

जम्मू। श्री बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा गुरुवार से शुरू होगी। बेशक इस बार भी यात्रा पर आतंकी हमलों का साया हो, मगर देशभर से जम्मू पहुंच रहे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। उनमें कोई भय नहीं है। बुधवार को जम्मू के भगवती नगर से इन श्रद्धालुओं का पहला जत्था बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना हो गया। यात्रा सुरक्षित हो और श्रद्धालुओं को लखनपुर से लेकर भवन तक के दोनों मार्गों पर कोई भी परेशानी न हो, इसके लिए पूरी तैयारियां की गई हैं।
जम्मू में ठहरने के इंतजाम
देशभर से जम्मू पहुंचने पर बाबा बर्फानी श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने कई जगहों पर प्रबंध किए हुए हैं। जम्मू में आधार शिविर भगवती नगर में लगाया गया है। इसमें 1400 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। दो मंजिला इस इमारत की एक मंजिल को वातानुकूलित बनाया गया है ताकि जम्मू की गर्मी में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। जम्मू में इस समय औसतन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। अगर जम्मू में 1400 से अधिक श्रद्धालु आते हैं तो उनके ठहरने के लिए अन्य कई जगहों पर भी प्रबंध हैं।
ज्यूल क्षेत्र में विनायक धर्मशाला में 200-300, गुरुद्वारा सुंदर सिंह मार्ग पर अग्रवाल धर्मशाला में 300-400 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। साधुओं के ठहरने के लिए पुरानी मंडी के राम मंदिर और परेड स्थित का गीता भवन में प्रबंध किए गए हैं। इन दोनों ही जगहों पर करीब डेढ़ हजार श्रद्धालु ठहर सकते हैं।
ठहरने से लेकर स्वास्थ्य, लंगर तक की व्यवस्था
भगवती नगर से श्रद्धालुओं को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आधार शिविर बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना किया जाएगा। ये दोनों ही यात्रा के आधार शिविर हैं और दोनों ही जगहों पर हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने से लेकर स्वास्थ्य, लंगर तक की व्यवस्था की गई है।
पहलगाम से पांच दिन में यात्रा
पहलगाम मार्ग : पांच दिन में यात्रा-पहलगाम से चंदनवाड़ी का सफर गाड़ी से तय होता है, जिसके बाद पदयात्रा करनी पड़ती है। कहा जाता है कि पहलगाम में भगवान शिव ने अपने नंदीगण को छोड़ा था।
चंदनबाड़ीः चंदनबाड़ी दूसरा पड़ाव है। यह पहलगाम से 16 किमी दूर है।-कहते हैं कि भगवान शिव ने इस स्थान पर अपनी जटा से चंद्रमा को छोड़ दिया था।
शेषनाग : इस मार्ग पर तीसरा पड़ाव शेषनाग आता है। यह चंदनबाड़ी से बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहते हैं कि इस जगह पर भगवान शिव ने सर्पों को छोड़ दिया था।
पंचरलणीः पंचतरणी यात्रा का चौथा पड़ाव है। यह शेषनाग से 12 किमी दूर है। पंचतरणी में पहलगाम और बालटाल दोनों जगहों से हेलिकॉप्टर यहीं आकर रुकते हैं। यहां से श्रद्धालु पैदल या फिर घोड़ों पर यात्रा करते हैं।
पवित्र गुफाः यह पांचवां पड़ाव है। पंजतरणी से यह छह किलोमीटर की दूरी पर है। हर दिन पवित्र गुफा में पंद्रह हजार लोगों के दर्शन करने की व्यवस्था की गई है। यहां पर भी गैर सरकारी संगठनों ने लंगर लगाए होते हैं। यहां जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना, सीआरपीएफ के जवान यहां पर चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। -पवित्र गुफा तक घोड़े या फिर पैदल ही श्रद्धालु आ सकते हैं।
बालटाल मार्ग : मात्र मार्ग 16 किमी का
-बालटाल से पवित्र गुफा तक यह छोटा मार्ग है और मात्र 16 किलोमीटर है।
-यह मार्ग काफी दुर्गम व कठिन है।
इस बार यह है खास
चिप से करेंगे ट्रैक
- श्रद्धालुओं की गाड़ियों में चिप लगाई जा रही है, ताकि सुरक्षा के लिहाज से उन्हें ट्रैक किया जा सके।
-जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और सेना के जवानों को जगह-जगह तैनात किया गया है।
-यात्रा पर ड्रोन से भी नजर रखी जा रही है।
2011- 2012 में छह-छह लाख पहुंचे
वर्ष श्रद्धालु (लाख)
2010 4.55
2011 6.36
2012 6.22
2013 3.53
2014 3. 72
2015 3.52
2016 2.20
2017 2. 60
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