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MP : कांग्रेस-बसपा मिल जाएं तो भाजपा को जीतने के लिए लगाना होगा 'जोर'

मुरैना। यूं जौरा कभी भाजपा का गढ़ नहीं रहा। भाजपा को जौरा सीट पर आजादी के बाद पहली बार 2013 में सफलता मिली। सफलता भी पार्टी को नहीं बल्कि व्यक्ति को मिली थी। भाजपा के टिकट पर विधायक बने सूबेदार सिंह इससे पहले भी तीन बार इस सीट से विधायक रह चुके थे,लेकिन तब वे कभी जनता पार्टी से तो कभी जनता दल से चुनकर आए थे। पिछली बार जब उन्होंने भाजपा का दामन थामा तो भाजपा जौरा सीट पर अपना रिकार्ड ठीक करने की स्थिति में आ पाई।
इस सीट से कांग्रेस कई बार जीती, बसपा को भी तीन बार सफलता मिली,लेकिन भाजपा के दिन सूबेदार सिंह ने ही आकर बदले। सूबेदार सिंह यदि दोबारा भाजपा से लड़ते हैं तो कांग्रेस और बसपा को दिक्कत होगी, पर यदि बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े तो सूबेदार सिंह और भाजपा मुश्किल में आ सकते हैं।
कांग्रेस की परेशानी यह है कि कि उसके पास अब इस सीट पर कोई ऐसा चेहरा नहीं है जो क्षेत्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर सके। अंतर्कलह से भी कांग्रेस जूझ रही है। यही हाल बसपा का भी है। हालांकि 2013 में भाजपा के उम्मीदवार की जीत महज कुछ हजार वोटों से हुई थी। हां यदि यहां पर कांग्रेस व बसपा एक होकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के लिए मुश्किल जरूर हो सकती है।
फैक्ट फाइल
कुल मतदाता- 230453
पुरुष मतदाता- 126923
महिला मतदाता- 103516
मतदान केंद्र- 294
जातीय समीकरण: ब्राह्मण, धाकड़, क्षत्रीय व कुशवाह निर्णायक स्थिति में हैं। मुस्लिम भी काफी हद तक प्रभावित करते हैं।
2013 का परिणाम
सूबेदार सिंह: भाजपा 42421
बनवारीलाल: कांग्रेस 39923
मनीराम: 30418
पिछले दो चुनाव की स्थिति
पार्टी 2003 -2008
भाजपा- 09.03 - 15.15
कांग्रेस- 20.16 - 23.99
बसपा- 15.55 - 31.39
(वोट प्रतिशत में)
पांच बड़े वादे और उनकी स्थिति
जौरा में पगारा डैम से पानी लाने, सिकरौदा व नैपरी पुल बनवाने, नहर के किनारे सड़क बनवान व क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक सड़क बनवाने व कैलारस शुगर मिल बनवाने का वादा किया था। इनमें से शुगर मिल को छोड़कर सभी घोषणाओं पर 80 से 90 फीसदी काम हो चुका है।
विधायक से सीधी बात
जौरा क्षेत्र में आजादी के बाद से कोई काम नहीं हुआ। मैंने जीतने के बाद सभी बड़ी घोषणाओं को पूरा किया है। शुगर मिल को लेकर सरकार स्तर पर काम चल रहा है और यह मिल भी जल्द शुरू हो जाएगी। जिससे किसानों को फायदा होगा।
सुबेदार सिंह रजौधा, विधायक
दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी का मत
भाजपा विधायक जिन योजनाओं पर काम कर रहे हैं। वे कांग्रेस शासन में ही बनाई गई थीं। विधायक ने तो केवल अब मंजूर करवाकर उन्हें पूरा करवा रहे हैं। क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार भी खूब चल रहा है। साथ ही बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए विधायक ने काम नहीं किया। पहाड़गढ़ क्षेत्र से लगातार पलायन हो रहा है।
बनवारीलाल शर्मा, कांग्रेस
2018 में संभावित प्रत्याशी
भाजपा: सूबेदार सिंह रजौधा, भाजपा अध्यक्ष अनूप सिंह भदौरिया, नागेंद्र तिवारी ।
कांग्रेस : बनवारीलाल शर्मा, राजाबेटी व्यास, कैलाश मित्तल
बसपा: वृंदावन सिंह सिकरवार, मनीराम धाकड़
वर्तमान में मैदानी स्थिति
वर्तमान में भाजपा विधायक ने विकास कार्य सहित लोगों को मृत्यु या बीमारी आदि होने पर सीधे मुख्यमंत्री सहायता कोष से राहत दिलवाई है। ऐसे में भाजपा यहां मजबूत स्थिति में है। साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष भी नहीं है। वहीं कांग्रेस अभी बनवारीलाल शर्मा व कैलाश मित्तल के भरोसे है। साथ ही कार्यकर्ताओं में खासा असंतोष है। यदि टिकट वितरण ठीक नहीं होता है तो यहां पर कांग्रेस की स्थिति बिगड़ सकती है। बसपा कुशवाह व धाकड़ वोट बैंक के सहारे उतरेगी।
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