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आबकारी घोटाले में शामिल रहा अफसर कागजों में बरेली में पदस्थ

रायसेन। इंदौर के बहुचर्चित 42 करोड़ के आबकारी घोटाले में शामिल रहे एक अफसर ने निलंबन के बाद बहाली पाकर रायसेन जिले में तो पदस्थापना तो पा ली लेकिन वो है कहां? इसका जवाब खुद अफसर से लेकर जिले के आबकारी विभाग के पास नहीं है।
सूत्रों की बात पर अगर भरोसा करें तो राजधानी से सटे और सरकार के तीन मंत्रियों वाले जिले में आबकारी विभाग के ही संरक्षण से उक्त अफसर अब भी इंदौर में ही लाइजनिंग कर रहे हैं।
जिले में आमद दर्ज कराने के बाद बरेली एडीओ के रूप में पदस्थापना ले चुके एसएन पाठक को आबकारी विभाग के ही कर्मचारियों ने 2 माह से बरेली में नहीं देखा है। जबकि सहायक आबकारी आयुक्त चन्द्रप्रकाश सांवले का दावा है कि पाठक न केवल बरेली में पदस्थ हैं। बल्कि वहां रहते भी हैं।
सूत्रों के जरिए जब बरेली के आबकारी अमले से उनके स्थानीय निवास व मौजूदगी की जानकारी जुटाई गई तो जो बात सामने आई है उससे एक बार फिर सरकार की मंशा पर नौकरशाही भारी पड़ती नजर आ रही है। खुद आबकारी अमले ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि एडीओ बरेली में रहते ही नहीं हैं। और न यहां कभी उन्हें यहां देखा गया। अब ऐसे में सहायक आबकारी आयुक्त के दावे को उनके ही विभाग के लोग झुठला रहे हैं।
एक नजर... आबकारी घोटाले पर
बीते साल 8 अगस्त को इंदौर में एक औचक निरीक्षण में 41 करोड़ 72 लाख का घोटाला सामने आया था। तीन साल से पहले से इसे अंजाम दिया जा रहा था। इसके जरिए शराब ठेकेदार ट्रेजरी में कम राशि जमा करते थे और चालान में हेरफेर कर अधिक राशि दर्शाते थे।
सैकड़ों चालान में इस तरह की गड़बड़ विभागीय अमले के संरक्षण में होना सामने आने के बाद इंदौर के सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे, लसूड़िया वेयर हाऊस के प्रभारी डीएस सिसौदिया, महू वेयर हाऊस के प्रभारी एसएन पाठक (जो अब कागजों में रायसेन जिले में पदस्थ हैं), एसआई कौशल्या सबनानी, क्लर्क धनराज सिंह और अनमोल गुप्ते को निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में शराब ठेकेदार सहित 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद तीन शराब दुकानों के ठेके भी निरस्त कर दिए गए थे।
जिले में भी सामने आ सकता है फर्जी मामला
जिले के विभागीय सूत्रों का कहना है कि अगर जिले के आबकारी विभाग सहित एक शराब निर्माता कंपनी के जमा कागजों की कलेक्टर द्वारा जांच करा ली जाए तो एक बड़ा घोटाला जिले में भी सामने आ सकता है। सूत्रों की बात पर भरोसा किया जाए तो पुराने विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में जिले में भी इस तरह के कृत्यों को अंजाम दिया गया है।
वो तो बरेली में एडीओ हैं
एसएन पाठक निलंबन उपरांत बहाली पाकर जिले में पदस्थ हुए हैं। वो बरेली एडीओ हैं और वहीं रहते भी हैं। 
चन्द्रप्रकाश सांवले, सहायक आबकारी आयुक्त रायसेन
बात करने से बचे एसएन पाठक
इस मामले में जब एडीओ एसएन पाठक से उनके मोबाइल नंबर 9425300777 पर बात करने का प्रयास किया गया तो पहले उन्होंने कवरेज में नहीं होने की बात कहकर फोन कट कर दिया। इसके बाद कॉल करने पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। दूसरे नंबर से बात करने पर उन्होंने बहाना बनाकर बात करने से मना कर दिया।
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