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दिनभर हुई यात्रियों की फजीहत, शाम को बस हड़ताल समाप्‍त

इंदौर। यात्री किराया 10 प्रतिशत की बजाय 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग को लेकर बस संचालकों ने हड़ताल आरंभ कर दी। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ा।हालांकि देर शाम आरटीओ से चर्चा के बाद इंदौर में हड़ताल समाप्‍त कर दी गई।
उल्‍लेखनीय है कि राज्य सरकार ने रविवार को सार्वजनिक वाहनों (सभी प्रकार की अंतरराज्यीय बसों) के यात्री किराए में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है हालांकि इसके बाद भी प्रदेश में हड़ताल को लेकर पसोपेश की स्थिति रही।
किराया बढ़ोतरी पर सहमति जताते हुए जहां भोपाल के बस मालिकों ने हड़ताल स्थगित कर दी थी। वहीं इंदौर में बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने बैठक बुलाई और सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल आरंभ की। इंदौर, उज्जैन और जबलपुर संभाग के अधिकांश जिलों के ऑपरेटरों ने हड़ताल आरंभ की इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इंदौर संभाग की यात्री बसों की हड़ताल स्थगित
देर शाम इंदौर संभाग में यात्री बसों की हड़ताल समाप्‍त कर दी गई। परिवहन आयुक्त के प्रतिनिधि बन कर पहुंचे इंदौर आरटीओ जितेंद्र सिंह रघुवंशी ने मोटर मालिकों से चर्चा की। पहले बस स्टैंड और बाद में रेसीडेंसी कोठी में हुई चर्चा के बाद मोटर मालिक हड़ताल समाप्‍त करने पर राजी हो गए। शासन की घोषणा के अनुसार 10 प्रतिशत किराया बढाने की घोषणा की अधिकृत जानकारी दी गई। शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। इसके बाद यात्री बस किराए में 10 प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी। 23 मई को परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त के साथ बैठक के लिए बस संचालक संगठन के प्रतिनिधि भोपाल जाएंगे। शाम 7 बजे से बसों का संचालन प्रारंभ हो गया।
बस मालिकों की मांग है कि यात्री किराया 10 प्रतिशत की बजाय 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। फरवरी में किराया निर्धारण बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें बस मालिकों ने 40 प्रतिशत किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इस पर विचार करते हुए राज्य सरकार ने सभी प्रकार की यात्री बसों का किराया 10 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने का निर्णय लिया।
मिला-जुला रहा बसों की हड़ताल का असर
देवास। बसों की हड़ताल का देवास में मिलाजुला असर रहा। यहां से इंदौर, उज्जैन, भोपाल, शाजापुर, सारंगपुर, ब्यावरा व अन्य ग्रामीण रूट पर करीब 600 बसें चलती हैं। लगभग सभी बसें बंद रही। हालांकि सुबह करीब 8.30 बजे तक इंदौर-उज्जैन रूट पर बसें चलती रही। शाम को भी कुछ ऑपरेटरों ने बसें चलाई। प्रशासन ने विकल्प के तौर पर मैजिक की व्यवस्था की थी। जो बसों के निर्धारित किराए पर इंदौर-उज्जैन, मक्सी और ग्रामीण रूट पर चलाई गई। हड़ताल से भोपाल व लंबी दूरी के रूट पर दिक्कत आई। लेकिन बायपास से गुजरने वाली वीडियोकोच बसों के चलने से यात्रियों ने उनका सहारा लिया।
खंडवा में 300 बसें नहीं चली, ऑटो चालकों ने वसूला दोगुना किराया
खंडवा। जिलेभर में करीब 300 बसों के पहिए थमे रहे। बस स्टैंड पर सुबह से पहुंचने वाले यात्रियों को ऑटो और टैक्सी से सफर करना पड़ा। यात्रियों से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों ने दोगुना किराया वसूलकर गंतव्य तक छोड़ा। पीथमपुर, सनावद और खरगोन ओंकारेश्वर सहित जिले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए यात्रियों को साधन तो मिला लेकिन अधिक किराए के कारण आर्थिक बोझ उठाना पड़ा।
बुरहानपुर में 250 बसें नहीं चलीं
बुरहानपुर। मप्र सहित गुजरात, राजस्थान व महाराष्ट्र के विभिन्न् शहरों की करीब 250 बसें नहीं चलीं। इससे हजारों यात्री परेशान हुए। रोजाना यहां से करीब 20 हजार यात्री आवागमन करते हैं। कई यात्रियों को हड़ताल की जानकारी नहीं होने से परेशान हुए। ऑटो, टेम्पो व अन्य निजी वाहनों से दोगुना से अधिक किराया देकर गंतव्य तक पहुंचे। बसें नहीं चलने से बस स्टैंड क्षेत्र की दुकानों के व्यापार पर भी असर पड़ा।
महू। बसों के किराए में 40 प्रश वृद्धि की मांग को लेकर बसों की हड़ताल पूरी तरह सफल रही। महू, इंदौर, पीथमपुर व मानपुर के बीच चलने वाली करीब 80 उपनगरीय बसें दिनभर खड़ी रहीं। हड़ताल के कारण प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रेल व आई बसों में यात्रियों की भारी भीड़ रही। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली कुछ मैजिक वाहन सोमवार को महू-इंदौर के बीच चले जिसमें प्रति यात्री 40 से 50 रु. किराया वसूला गया। हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी नौकरीपेशा व विद्यार्थी वर्ग को हुई। कुछ ने अवकाश मनाया तो कुछ अपने-अपने साधन से गए। बस स्टैंड पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।
मंदसौर जिले में चक्के थमे रहे बसों के
मंदसौर। जिले भर में आने-जाने वाली 605 बसों के चक्के सोमवार को पुरी तरह थमे रहे। आवागमन के लिए पूरी तरह बसों पर ही निर्भर यात्री दिनभर परेशान होते रहे। नारायणगढ़ के भाजपा नेताओं की कोठारी ट्रेवल्स की 2 बसें जरूर मंदसौर-नीमच के बीच चली। इधर शामगढ़, सुवासरा के साथ ही मंदसौर, पिपलियामंडी, दलौदा के लोगों ने तो आने-जाने के लिए ट्रेन सुविधा का उपयोग कर लिया। पर सीतामऊ, गरोठ, भानपुरा, गांधीसागर, नारायणगढ़ सहित सैकड़ों गांवों के लोग आने-जाने के लिए तरस गए। पहली बार बस संचालकों ने इस तरह की एकता दिखाई। दिन में आने वाली ट्रेनों में रोज से ज्यादा भीड़ रही।
हड़ताल में रेल व रोडवेज की बसों का सहारा, अन्य में सिर्फ 8 बसें चली
नीमच। जिले में बसों की हड़ताल के दौरान रेल व राजस्थान रोडवेज की बसें यात्रियों के लिए सहारा बनी। वहीं हड़ताल के बावजूद विभिन्न् रूट पर 8 बसों का संचालन हुआ। किराये में वृद्धि की मांग को लेकर जिले के बस संचालकों ने सोमवार को बसों का संचालन बंद रखा। सिर्फ मंदसौर मार्ग पर 6 और पड़दा मार्ग पर 2 बसों का संचालन हुआ। बसों की हड़ताल के दौरान राजस्थान रोडवेज व रेल सहारा बनी। लेकिन ऑटो व मैजिक चालकों ने यात्रियों से अधिक किराया वसूला। सुरक्षा की दृष्टि से सीएसपी टीसी पंवार फोर्स के साथ अलर्ट दिखाई दिए। सामान्य दिनों की तुलना में प्राइवेट व रोडवेज बस स्टैंड सूने दिखाई दिए।
दमोह। यात्री बसों की हड़ताल से यात्री परेशान हुए । अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पूरे प्रदेश के साथ आज दमोह में भी यात्री बसों के संचालकों ने अपनी बसें बंद रखीं। सुबह से ही यात्री परेशान होते रहे और ऑटो चालकों ने मनमाना किराया वसूला।
नरसिंहपुर। किराए में बढ़ोतरी की मांग को लेकर बस ऑपरेटर्स की हड़ताल से लोग परेशान हो गए। विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से आने जाने वाले लोगबहुत अधिक परेशान हुए। भीषण गर्मी के दौर में बस स्टैंड में पचासों बसों के पहिए जाम रहे। यात्री इधर से उधर भटक रहे हैं। ऑटो चालक और अन्य वाहन इसका बेजा लाभ लेते हुए मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं।
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