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परमाणु डील से अमेरिका के अलग होने पर रूस और फ्रांस निराश, ईरान नाराज

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के साथ परमाणु समझौते से खुद को अलग करने के बाद जहां रूस और फ्रांस निराश हैं वहीं ईरान ने कहा है कि वो इस डील में बना रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान की चेतावनी को दरकिनार करते हुए 2015 में हुए परमाणु समझौते को खत्म करने का फैसला लिया।
मंगलवार को व्हाइट हाउस से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग होने की घोषणा की। हालांकि ट्रंप के इस ऐलान के बाद तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि उनका देश अमेरिका के बिना भी इस परमाणु समझौते का हिस्सा बना रहेगा।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने कहा, 'ईरान समझौता मूल रूप से दोषपूर्ण है, इसलिए मैं आज (मंगलवार) ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने की घोषणा कर रहा हूं।' जिसके बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ ताजा प्रतिबंधों वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये। साथ ही ट्रंप ने आगाह किया कि जो भी ईरान की मदद करेगा उन्हें भी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से दुनिया में यह संदेश जाएगा कि अमेरिका सिर्फ धमकी ही नहीं देता है, बल्कि करके भी दिखाता है।
अमेरिका के हित में फैसला: ट्रंप
इस बीच ट्रंप ने दावा किया कि इस परमाणु समझौते से अलग होना अमेरिका के हित में है। इससे अमेरिका को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि वो इस परमाणु समझौते को 12 मई से आगे नहीं बढ़ाएंगे। ट्रंप ने सख्ती के साथ कहा था कि अमेरिका के यूरोपीय सहयोगी न्यूक्लियर डील की खामियों को दूर करें, अन्यथा वे फिर से पाबंदी लगाएंगे।
फैसले की ईरान ने की निंदा
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ट्रंप के इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस फैसले के तुरंत बाद ईरान ने कहा कि उनका देश अगले सप्ताह से पहले से कहीं अधिक मात्रा में यूरेनियम का संवर्धन करेगा। रूहानी ने कहा, 'मैं ट्रंप के फैसले पर यूरोप, रूस, चीन से बात करूंगा।' उन्होंने कहा कि वे अपने सहयोगियों और परमाणु समझौते में शामिल अन्य देशों के साथ बातचीत के लिए कुछ हफ्ते ही इंतजार करेंगे।
ट्रंप के उलट ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने भी साफ कर दिया है कि जब देश की रक्षा की बात आएगी तो ईरान किसी से भी कोई समझौता नहीं करेगा। टेलीविजन पर दिए अपने भाषण में उन्होंने कहा कि यदि ट्रंप को लगता है कि यह संधि एक ऐतिहासिक भूल थी तो उसको वे कूड़े में डाल दें। ईरान अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बना सकता है। इसका किसी देश से कोई लेना-देना नहीं है।
ट्रंप के फैसले पर प्रतिक्रिया
- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इस फैसले को बड़ी गलती बताया है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी।
- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिका को अलग करने का ट्रंप का फैसला बिल्कुल सही और साहसिक है।
- फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों ने इस फैसले पर दुख जताते हुए कहा है कि अमेरिका के इस फैसले से रूस, जर्मनी और ब्रिटेन निराश हैं।
- रूस का कहना है कि वह ट्रंप के फैसले से बेहद निराश है।
क्या है 2015 परमाणु डील
बता दें कि जुलाई 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ मिलकर ईरान ने परमाणु समझौता किया था। समझौते के मुताबिक ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना था और अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलना था, बदले में उसपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में आंशिक रियायत दी गई थी। लेकिन ट्रंप का आरोप है कि ईरान ने दुनिया से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखा।
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