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जस्टिस जोसेफ मामले में कोलेजियम आज फिर करेगा विचार

नई दिल्ली। उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के मामले में सुप्रीम कोर्ट का कोलेजियम बुधवार को फिर से विचार करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट व सरकार के बीच तनातनी की वजह बने जोसेफ के मामले में होने वाली बैठक अहम मानी जा रही है। कोलेजियम के कुछ सदस्य केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। इस बैठक में फिर से उनके मुखर होने की पूरी संभावना है।
गौरतलब है कि जोसेफ ने ही वह विवादास्पद फैसला दिया था जिसकी वजह से 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का केंद्र का आदेश निष्प्रभावी हो गया था। मामले की सुनवाई हाई कोर्ट की जिस बेंच ने की थी, उसकी अगुआई जोसेफ कर रहे थे।
माना जा रहा है कि केंद्र ने अपनी खुन्नस निकालने के लिए उनके नाम पर आपत्ति जताई थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अगुआई में कोलेजियम उन विकल्पों पर विचार करेगा जिससे जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में लाया जा सके। कोलेजियम के बाकी सदस्यों में जस्टिस जे चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर व कुरियन जोसेफ हैं।
जस्टिस जोसेफ के साथ कोलेजियम ने वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश 10 जनवरी को की थी। 26 अप्रैल को केंद्र ने इंदु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी देते हुए जोसेफ के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने से इन्कार कर दिया था।
कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद की तरफ से भेजे गए नोट में कुछ तकनीकी कारण भी इसके लिए गिनाए गए थे। इनमें कहा गया था कि जोसेफ केरल से आते हैं और सुप्रीम कोर्ट में इस राज्य का प्रतिनिधित्व पहले ही ज्यादा है। दूसरा तर्क था कि वरिष्ठता सूची में जोसेफ 45 वें नंबर पर हैं। जोसेफ 2014 से उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। वह 2004 में केरल हाई कोर्ट के स्थायी सदस्य बने थे। इंदु मल्होत्रा 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में कार्यभार ले चुकी हैं।
एनजेएसी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला था गलतः रोहतगी
अटार्नी जनरल रहे मुकुल रोहतगी ने कहा है कि एनजेएसी (नेशनल जूडिशियल अपॉइंटमेंट एक्ट) मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत था। वह दिल्ली विवि के एलुमनी (पूर्व छात्र) समारोह में बोल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में संविधान में संशोधन के फैसले को 4-1 के बहुमत से खारिज कर दिया था। इसके जरिये न्यायपालिका की भर्तियों में सरकार का दखल पहले की अपेक्षा बढ़ जाना था।
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