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महाभियोग मामलाः कांग्रेस की याचिका पर पांच जजों की पीठ आज करेगी सुनवाई

नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने का महाभियोग नोटिस अस्वीकार किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस के दो सांसदों द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ मंगलवार को सुनवाई करेगी। इससे पहले सोमवार को प्रताप सिंह बाजवा और डॉ. अमी हर्षद्रय याज्ञनिक ने याचिका दाखिल कर राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू के महाभियोग नोटिस अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी थी।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के 64 सांसदों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर कदाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू को महाभियोग नोटिस दिया था। लेकिन सभापति ने गत 23 अप्रैल को नोटिस अस्वीकार कर दिया था। सोमवार को कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे नंबर के वरिष्ठतम न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर की अदालत में याचिका का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई पर लगाने का आदेश मांगा।
गत जनवरी में जस्टिस चेलमेश्वर के घर पर ही चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रेस कान्फ्रेंस की थी। सिब्बल ने जैसे ही याचिका लिस्ट करने का आदेश मांगा तो जस्टिस चेलमेश्वर की पीठ ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वे इसे नहीं सुन सकते। ये मामला प्रधान न्यायाधीश के समक्ष मेंशन करें। हालांकि जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने कोई आदेश नहीं दिया और सिब्बल से मंगलवार को आने को कहा। हालांकि, इस बीच याचिका पर सुनवाई की पीठ तय हो गई।
शाम को सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट पर जारी मंगलवार की सुनवाई सूची में याचिका पांच न्यायाधीशों(जस्टिस एके सीकरी, एसए बोबडे, एनवी रमना, अरुण मिश्रा और आदर्श कुमार गोयल) की संविधान पीठ के सामने लगी हुई है।
राज्यसभा नियमों में भी जज के महाभियोग पर सार्वजनिक चर्चा की मनाही : सुप्रीम कोर्ट
न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग पर विपक्षी सांसदों की सार्वजनिक बयानबाजी पर टिप्पणी करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि राज्यसभा नियम भी जज के महाभियोग पर नोटिस स्वीकार होने तक सार्वजनिक चर्चा की मनाही करते हैं। हालांकि, कोर्ट ने सांसदों के सार्वजनिक चर्चा और बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह तक टाल दी।
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