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कर्नाटक चुनाव प्रचार में आज से उतरेंगे पीएम मोदी, करेंगे तीन रैलियां

नई दिल्ली। कर्नाटक चुनाव के मैदान में पीएम मोदी आज से उतरेंगे। प्रधानमंत्री आज राज्य में तीन चुनावी रैलियां करेंगे। भाजपा ने कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 150 पर जीत का लक्ष्य निर्धारित किया है। इतनी सीटों का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की 17 रैलियों की योजना बहुत सोचसमझ कर तैयार की गई है। चुनाव घोषित होने के बाद पहली बार एक मई को प्रधानमंत्री की तीन रैलियां होने जा रही हैं। इनमें से एक रैली मध्य कर्नाटक में, दूसरी दक्षिण क्षेत्र एवं तीसरी हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में होगी।
मध्य कर्नाटक के चामराज नगर जनपद में भाजपा हमेशा से कमजोर रही है। एससी/एसटी बहुल यह क्षेत्र चंदन तस्कर वीरप्पन के प्रभाव वाले कोल्लेगाल वन से सटा हुआ है। इसी क्षेत्र के दलित नेता श्रीनिवास प्रसाद राज्य की कांग्रेस सरकार से काबीना मंत्री पद से हटाए जाने के बाद भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वह चुनाव तो नहीं लड़ेंगे, लेकिन इस क्षेत्र से कांग्रेस को उखाड़ फेकेंगे। बता दें कि श्रीनिवास प्रसाद अटल की राजग सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।
कर्नाटक में विकास से भटककर जाति और संप्रदाय केंद्रित तीखी हो रही चुनावी राजनीति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपनी पहली रैली से ही अनुसूचित जाति और लिंगायत जैसे दो सबसे अहम व करीब 45 फीसदी आबादी वाले समूहों को संदेश देंगे। उनकी पहली रैली सानतेमराहाली में होगी जो न सिर्फ देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है बल्कि विधानसभा क्षेत्र और संसदीय क्षेत्र भी आरक्षित है।
इस चामराजनगर संसदीय क्षेत्र के अंदर ही वह हाईप्रोफाइल वरुणा सीट भी आती है जो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की वर्तमान सीट है। इतना ही नहीं इस सीट से टिकट आवंटन को मुद्दा बनाकर कांग्रेस लिंगायत वोट को तोड़ने में भी जुटी है।
पूरा दांव मोदी पर ही
भाजपा का पूरा दांव अपने स्टार प्रचारक मोदी पर ही लगा है। ऐसे में अभियान की रूपरेखा कुछ इस तरह तैयार की गई है कि सिद्धारमैया पर सीधा वार भी हो और अपनी चारदीवारी भी मजबूत की जाए। गौरतलब है कि चुनाव घोषणा से कुछ पहले लिंगायत को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने का चुनावी पासा फेंककर सिद्धारमैया ने भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
उसके बाद वरुणा सीट पर जिस तरह उम्मीदवार तय करने में भाजपा अंतिम वक्त तक उलझी रही और अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदीयुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को टिकट नहीं दिया गया, उसे भी कांग्रेस हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।येदी को लेकर फैला रहे भ्रमध्यान रहे कि मोदी ने कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के नेताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम के प्रति सचेत किया था। लिंगायत समुदाय के बीच एक भ्रम यह भी फैलाया जा रहा है कि विजयेंद्र को टिकट न देने का परोक्ष अर्थ यह है कि चुनाव के बाद भाजपा येदीयुरप्पा से भी किनारा कर लेगी।
येदीयुरप्पा लिंगायत के सबसे प्रभावी नेता हैं और जाहिर तौर पर अगर लिंगायत टूटने का फायदा कांग्रेस को ही होगा क्योंकि जदएस पूरी तरह वोकालिग्गा की पार्टी मानी जाती है। दूसरी तरफ दलित समुदाय के बीच काफी पहले से भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।
ओल्ड मैसूर से शुरुआत
भाजपा सूत्रों की मानी जाए तो मोदी की पहली रैली का चुनाव हर पहलू को देखकर किया गया। इसमें कोई संदेह भी नहीं कि मंगलवार की सुबह जब वह ओल्ड मैसूर के सानतेमराहाली से रैली को संबोधित करेंगे तो इन दोनों वर्गों को संदेश दिया जाएगा। संभव है कि येदीयुरप्पा परिवार को भी कुछ संदेश दिया जाए।
दलित 26 व लिंगायत 18 फीसदी
-224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक में दलितों की संख्या लगभग 26 फीसदी है और लिंगायत लगभग 18 फीसदी है।
-पिछले चुनाव में लगभग 36 सीटें ऐसी थीं जहां 5 हजार से कम वोटों से फैसला हुआ था।
-इस बार जब भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है तो मोदी की रैली खास मायने रखती है। 
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