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सद्दाम के जोकर से 15 लाख का इनामी आतंकी बनने की ऐसी है कहानी

श्रीनगर। बादीगाम में रविवार की सुबह लोगों की नींद मस्जिद की अजान से नहीं बल्कि गोलियाें की आवाज से खुली और करीब पांच घंटे बाद जब गोलियों की बौछार थमी तो लोगों को हंसाते-हंसाते डर और मौत का पर्याय बन चुका सद्दाम पाडर अपने चार अन्य साथियों संग मारा जा चुका था। उसकी मौत को शोपियां व उसके साथ सटे इलाकों में हिजबुल मुजाहिदीन के नेटवर्क के लिए एक बड़ा आघात माना जा रहा है।
वर्ष 2015 में मारे गए हिज्ब कमांडर बुरहान वानी समेत जिन 11 आतंकियों की फोटो ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाई थी, उसमें सद्दाम भी था। अब उस तस्वीर में शामिल आतंकियों में एक तारिक पंडित ही जिंदा बचा है और इस समय जेल में है।
शोपियां के हेफ गांव में टंगपोरा मोहल्ले का रहने वाले सद्दाम को लोगों ने वर्ष 2015 में जब पहली बार आतंकी बने देखा तो सब हैरान रह गए थे। पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने के बाद से सद्दाम पत्थरबाजी में लिप्त था और आतंकियों के लिए आेवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम भी करता था। लेकिन, वह आतंकी बनेगा, यह न पुलिस को यकीन था और न उसके परिजनों या दोस्तों को। स्कूल छोड़ने के बाद वह अक्सर अपने पिता के साथ अपने बाग में व्यस्त रहता था या फिर अपनी भेड़ों के साथ। जो समय बचता था तो वह गांव के चौराहे पर लोगों को हंसाने या फिर स्थानीय क्रिकेट मैदान पर विकेट कीपिंग करते ही नजर आता था। उसके बारे में कहा जाता है कि वह लोगों को हंसाने या किसी का स्वांग करने में इतना माहिर था कि उसे देखते ही सभी हंसने लगते थे। उसे सब जोकर समझते थे। लेकिन आतंकी संगठन में सक्रिय होने के बाद उसके जिक्र पर लोग हंसते नहीं सहम जाते थे।
वर्ष 2014 में वह राष्ट्रविरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में अंतिम बार पकड़ा गया और रिहा होने के कुछ दिनों बाद तक वह घर रहा। फिर एक दिन गायब हो गया और किसी काे नजर नहीं आया। लगभग छह से सात माह बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर उसकी फोटो देखी। सद्दाम शुरू में लश्कर-ए-तोएबा आतंकी संगठन में रहा। वह लश्कर कमांडर अबु रहमान और कासिम के साथ सीधे संपर्क में था। वर्ष 2015 में उसने हिजबुल मुजाहिदीन का दामन था और बुरहान वानी के करीबियों में उसे गिना जाता था।
सद्दाम ने ही दक्षिण कश्मीर विशेषकर शोपियां के पुलिसकर्मियों, सैन्यकर्मियों के परिजनों को धमकाने, पीटने की आतंकी साजिश को शुरू किया था। उसने ही गत वर्ष इरफान नामक एक सैन्यकर्मी को उसके घर से बुलाकर मौत के घाट उतारा था। इसके अलावा एक अध्यापक और लश्कर के एक पुराने ओवरग्राउंड वर्कर की अवंतीपोरा इलाके में हुई हत्या में भी उसका नाम आया था। बुरहान वानी के मारे जाने और जाकिर मूसा के हिज्ब से अलग होने के बाद शोपियां, पुलवामा, अवंतीपोर में हिज्ब के कैडर को संभालने हुए नए लड़कों की भर्ती करने व नए ठिकानों को तैयार करने में उसने अहम भूमिका निभाई है।
राज्य पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, सद्दाम ने करीब दो दर्जन से ज्यादा आतंकी वारदात को बीते दो साल में अंजाम दिया है। उसके जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने पर 15 लाख का इनाम था। उसकी मौत से शोपियां में हिज्ब ही नहीं लश्कर भी कमजोर होगा, यह तय है।
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