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मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग दूसरे शहरों में भी करेगा सुनवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पहली बार अब भोपाल से बाहर दूसरे शहरों में जाकर सुनवाई करेगा। आयोग को आम लोगों तक पहुंचाने और पीड़ितों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसकी शुरुआत पहले संभागीय मुख्यालयों से होगी, उसके बाद अन्य छोटे और दूरस्थ जिलों में भी आयोग अपनी दस्तक देगा। फरवरी से यह सिलसिला शुरू करने की तैयारी है।
मध्यप्रदेश में मानव अधिकार आयोग सितंबर 1995 से नागरिकों के अधिकार संरक्षण और संवर्धन में जुटा है, लेकिन आयोग की सुनवाई अभी भोपाल तक ही केन्द्रित रही। यह पहला अवसर है जब आयोग पीड़ितों की सुनवाई करने उनके जिलों में भी पहुंचेगा।
बताया जाता है कि इस निर्णय के पीछे सोच है कि प्रदेश के कुछ जिले और शहरों की दूरी राजधानी से 600 किलोमीटर तक है, ऐसे में दूरस्थ जिलों के पीड़ितों की पहुंच आयोग तक नहीं हो पाती। आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी नहीं आ पाते। छोटे जिले और शहरों में आयोग की सुनवाई शुरू होने से आयोग का दायरा और बढ़ेगा।
फरवरी से करेंगे शुरुआत
आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने एक विशेष चर्चा में 'नवदुनिया" को बताया कि काफी दिन से वह इस संबंध में विचार-विमर्श कर रहे थे। अब आयोग द्वारा किए जा रहे इस नए प्रयोग की पूरी योजना बन चुकी है, अगले महीने फरवरी से इस पर क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले संभागीय मुख्यालयों पर यह प्रयोग आजमाया जाएगा। जिस संभाग में जाएंगे उस क्षेत्र से संबंधित सभी शिकायतों की सुनवाई वहीं की जाएगी। नई शिकायतों पर भी संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे। कुछ ऐसे मामले जिनका निराकरण जिला स्तर पर संभव होगा, उन्हें भी मौके पर ही निपटा दिया जाएगा।
लोकल मामलों पर तुरंत फैसला
उन्होंने यह भी बताया कि आयोग में पेंडिंग सभी मामलों का नए सिरे से वर्गीकरण चल रहा है। आयोग में जो शिकायतें आती हैं उनमें 25-30 फीसदी ऐसी रहती हैं जिनका निराकरण स्थानीय स्तर पर हो सकता है। ऐसे प्रकरणों में भी अनावश्यक विलंब नहीं हो सकेगा। आयोग का मानना है कि इस प्रयोग को शुरू करने से ज्यादा से ज्यादा लोग आयोग के संपर्क में आएंगे और अपनी समस्याएं बताएंगे। ममतानी ने बताया कि यह सब जानते हैं कि पीड़ित व्यक्ति सभी जगह से निराश होने के बाद ही आयोग की शरण में आता है। इसलिए आयोग का प्रयास है कि हर व्यक्ति के मानव अधिकारों का संरक्षण हो सके।
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