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ग्रहण में हवन, यज्ञ का मिलता है एक लाख गुना अधिक फल

ग्वालियर। ग्रहणकाल में जप, तप, ध्यान, दान आदि करने से अनंत पुण्य मिलता है। 31 जनवरी को चंद्रग्रहण पड़ रहा है ज्योतिष के अनुसार चंद्रग्रहण का प्रभाव 108 दिन तक रहता है। भगवान वेदव्यास ने ग्रंथों में उल्लेख किया है कि ग्रहण के समय जो भी पुण्य, हवन, यज्ञ किया जाता है उसका एक लाख गुना अधिक फल सामान्य दिनों में किए गए हवन से प्राप्त होता है। यह विचार 165 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ में ग्रहणकाल के समय मनुष्य की जीवनक्रिया के बारे में बताते हुए ब्रम्हचारी प्रेमांनद महाराज ने श्रद्वालुओं को बताया।
शताब्दीपुरम स्थित ददरौआधाम में चल रहे 165 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में ब्रम्हचारी प्रेमानंद महाराज ने ग्रहणकाल के बारे में जो बातें पुराणों और ज्योतिषों द्वारा बताई गईं हैं उन पर श्रद्वालुओं के समक्ष प्रकाश डाला। ब्रम्हचारी प्रेमानंद महाराज ने बताया कि ग्रहणकाल में किए गए पुण्यकर्मो से मनुष्य के पापों का नाश होता है। चंद्रग्रहण का प्रभाव 108 दिन तक रहता है और जिन राशियों पर इसका प्रभाव हो उन्हें विशेष रूप से चंद्रग्रहण के समय जाप और दान करना चाहिए।
ज्योतिष के अनुसार ग्रहणकाल को शुभ नहीं माना जाता है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी चंद्रग्रहण के समय समुद्र में ज्वारभाटा आता है और प्राकृतिक आपदाओं के आने का खतरा रहता है। ग्रहणकाल के समय व्यक्तियों को घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए साथ ही ग्रहण के दर्शन भी नहीं करना चाहिए। गर्भवती स्त्रियों के लिए चंद्रग्रहण के दौरान बिलकुल भी दर्शन नहीं करना चाहिए।
मत्स्य पुराण के अनुसार ग्रहण काल के दौरान सभी मनुष्यों को श्वेत पुष्पों और चंदन से भगवान चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए। ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, तप, पूजा पाठ, मन्त्र, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यो का करना बहुत लाभकारी रहता है. धर्म सिन्धु के अनुसार, ग्रहण मोक्ष के उपरान्त पूजा पाठ, हवन, स्नान, छायादान, स्वर्णदान, तुलादान, गायदान, मन्त्र जाप आदि श्रेष्ठ होते हैं। ग्रहण काल के समय अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है, साधू संत और विद्वान लोग चंद्र्रग्रहण का बेताबी से इंतजार करते है।
यह करें चंद्र्रग्रहण में उपाय
अच्युतानंद महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म के मतानुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। ग्रहण के अशुभ प्रभावों से निजात पाने के लिए ग्रहण के दिन गरीबों को दान दें, भोजन कराएं, गायत्री मंत्र का अधिक से अधिक जप करें। अपने ईष्ट देव की आराधना करें और ग्रहण के समय उपवास रखें, और ग्रहण के समय उपवास करें। स्नान करने के बाद केवल ताजा भोजन ही करें। चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है । सूतक काल में जहाँ देव दर्शन वर्जित माने गये हैं जिसके चलते मंदिरों के पट भी बंद रखे जाते हैं। इस दिन जलाशयों, नदियों व मन्दिरों में राहू, केतु व सूर्य के मंत्र का जप करने से सिद्घि प्राप्त होती है और ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म हो जाता है ।
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