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जीएसटी और नोटबंदी से भारत की विकास दर घटेगी: IMF

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इस साल के लिए भारत की विकास दर को अनुमान से आधा प्रतिशत कम बताया है। आइएमएफ के मुताबिक इस साल भारत की आर्थिक विकास दर 6.7 फीसद रहेगी। विकास दर कम होने के पीछे आइएमएफ ने नोटबंदी और जीएसटी को बड़ी वजह बताया है। आइएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठक के ठीक पहले यह रिपोर्ट जारी की गई है।
विश्व अर्थव्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट में मुद्राकोष ने कहा कि भारत में विकास की गति धीमी हुई है। यह देश में बीते साल की नोटबंदी और इस वर्ष जुलाई से लागू जीएसटी के असर को दर्शाता है। पहले के दो पूर्वानुमानों में मुद्राकोष ने इसके 7.2 फीसद रहने की बात कही थी।
इसके मुताबिक 2017 में चीन की विकास दर 6.8 फीसद रहेगी। यानी भारतीय अर्थव्यवस्था चीन से रफ्तार के मामले में मामूली अंतर से पीछे रहेगी।
हालांकि आइएमएफ का मानना है कि आने वाले वर्ष के दौरान विकास दर बेहतर होगी। वर्ष 2018 में भारत की विकास दर 7.4 फीसद रह सकती है। जबकि अगले वर्ष के लिए चीन की ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसद किया गया है।
अगर ऐसा हुआ तो भारत को फिर से प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला तमगा वापस मिल जाएगा। इसमें भारत के आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का विशेष तौर पर जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी समेत अमल में लाए जा रहे कई मूलभूत सुधारों की वजह से विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इन्हीं सब के चलते मध्यावधि में भारत की विकास दर आठ फीसद के पार जा सकती है। इसमें श्रम कानूनों के साथ जमीन अधिग्रहण से जुड़े कानून को आसान बनाना कारोबारी माहौल को सुधारने के लिए आवश्यक बताया गया है।
यही नहीं, इसमें आइएमएफ ने सामाजिक सेवाओं, वित्त और शिक्षा मुहैया कराने में पुरुषों व महिलाओं के बीच की खाई को पाटने का सुझाव दिया है। ऐसा करना भारत जैसे देश में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए जरूरी है।
1999 से 2008 तक देश की विकास दर ऐसी रही-
वर्ष 1999 से 2008 के बीच देश की औसत विकास दर 6.9 फीसद रही। इसके बाद 2009 में बढ़कर 8.5 और साल 2010 में 10.3 फीसद तक चली गई। फिर 2011 में 6.6 फीसद पर आ गई। वर्ष 2012, 2013 और 2014 में क्रमशः 5.5, 6.4 व 7.5 फीसद रही। वैसे, मुद्राकोष का मानना है कि 2022 तक भारत की विकास दर 8.2 फीसद पर पहुंच सकती है।
ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया-
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने ग्लोबल आर्थिक विकास दर की अनुमान को बढ़ा दिया है। उसका मानना है कि चालू साल में ग्लोबल ग्रोथ 3.6 फीसद पर पहुंच जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, जापान, रूस और कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर के अनुमान को ऊपर उठाने का असर विश्व अर्थव्यस्था की रफ्तार पर भी नजर आएगा।
वर्ष 2018 में भी ग्लोबल विकास दर 0.1 फीसद की मामूली बढ़त के साथ 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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