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खाड़ी में तनाव के चलते MEA को सताने लगी 48 लाख भारतीयों की फिक्र

नई दिल्ली/दुबई। खाड़ी के देशों में आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीर तनाव पैदा हो गया है। सऊदी अरब, बहरीन, यमन, मिस्र, लीबिया, मालदीव और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस क्षेत्र के एक अन्य देश कतर से कूटनीतिक रिश्ते तोड़ लिए हैं। इसके बाद भारत ने भले ही कतर से संबंधों को बनाए रखने की बात कही हो लेकिन उसे गल्फ देशों में रह रहे 48 लाख भारतीयों और कतर में रह रहे अपने 6.5 नागरिकों की चिंता हो गई है।
कतर पर इन देशों ने मुस्लिम ब्रदरहुड, अलकायदा और आईएस जैसे आतंकी संगठनों के साथ रिश्ते रखने का आरोप लगाया है। इन देशों ने कतर से अपने राजनयिकों को बुलाना शुरूकर दिया है। लोगों के आने-जाने पर भी पाबंदी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जमीनी सीमा सील की जा रही है। इन देशों के बीच बढ़ रहे तनाव को भारत ने उनका आंतरिक मामला बताया, लेकिन यह कई वजहों से भारतीय हितों को प्रभावित कर सकता है।कच्चा तेल महंगा होने का भयः खाड़ी के देशों में तनाव बढ़ने का भारत पर सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर पड़ेगा। ये सभी देश कच्चे तेल के बड़े उत्पादक हैं। भारत सबसे ज्यादा तेल सऊदी अरब से लेता है, जबकि कतर से भारत सबसे ज्यादा प्राकृतिक गैस लेता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह पूरा इलाका बहुत ही महत्वपूर्ण है।
खाड़ी देशों में 48 लाख भारतीय
खाड़ी के देशों में सबसे ज्यादा 48 लाख 20 हजार भारतीय कामगार काम करते हैं। संयुक्त अरब अमीरात में 25-26 लाख और सऊदी अरब में 29-30 लाख भारतीय काम करते हैं। कतर में 6.30 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं। खाड़ी में तनाव होने पर इनके कामकाज पर असर पड़ सकता है।
कूटनीतिक स्तर पर चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार खाड़ी देशों के साथ लगातार अपने रिश्तों को मजबूत करने में जुटी है। भारत ईरान के साथ इसके विरोधी देश सऊदी अरब से भी रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मुताबिक, जहां सऊदी अरब ने पीएम को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है, तो अबूधाबी के प्रिंस गणतंत्र दिवस पर हमारे राजकीय अतिथि थे।
कतर ने न्याय के विरुद्ध बताया
- कतर ने पांच बड़े खाड़ी देशों व दो अन्य देशों के फैसले को आधारहीन और न्याय के विरुद्ध करार दिया है। -वह कई बार कह चुका है कि वह आतंकी संगठनों को धन और सुविधाएं नहीं देता है।
-ईरान के अनुसार, इसकी साजिश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी अरब दौरे के समय ही तैयार कर ली गई थी।
इसलिए चिढ़ा सऊदी अरब
ईरान में हसन रूहानी के दूसरी बार चुनाव जीतने पर कतर के अमीर तमीम बिन हामद अल थानी ने उन्हें बधाई दी। इससे सऊदी अरब चिढ़ गया। सऊदी अरब ईरान को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा मानता है।
अमेरिका ने कहा, बातचीत से मतभेद सुलझाएं
कतर में अमेरिका का बड़ा सैन्य अड्डा है और वहां पर 10 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा है कि इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बेहतर होगा कि अरब देश अपने मतभेद बातचीत के जरिए सुलझाएं।
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