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यूएस ने पहली बार भारतीय आतंकी को बताया ग्लोबल टेररिस्ट

नई दिल्ली । खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईस लगातार ब्रिटेन और यूरोपीय देशों को अपना निशाना बना रहा है। ये संगठन ना सिर्फ बेकसूर लोगों को सरेआम मौत के घाट उतार रहा है बल्कि इसके चलते आज पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका ने कार्रवाई करते हुए एक भारतीय सहित आईएस के तीन आतंकियों को 'ग्लोबल टेररिस्ट' करार दिया है।
पहली बार भारतीय आतंकी पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिका ने कर्नाटक के रहनेवाले इस्लामिक स्टेट के आतंकी शफी अरमार और दो अन्य को ग्लोबाल टेररिस्ट (अंतरराष्ट्रीय आतंकी) करार देते हुए उसके वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी है। यह पहला मौका है जब किसी आतंकी संगठन से जुड़े किसी भारतीय सदस्य पर अमेरिका ने इस तरह की कोई बड़ी कार्रवाई की हो।
क्यों लगा अरमार पर यूएस का प्रतिबंध
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से अरमार, औसमा अहमद अतर और मोहम्मद इसा यूसिफ के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध का बड़ा कारण है इन लोगों की आतंकी हरकतों के चलते अमेरिकी नागरिकों के सामने पैदा हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा का ख़तरा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इस कदम के बाद यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने तीनों नाम आतंकियों की विशेष रूप तैयार की गई सूची में डाल दिया है।
इस अमेरिकी प्रतिबंध के बाद विदेशाें में मौजूद उनकी परिसंपत्तियों की खरीद फरोख्‍त पर रोक लगा जाएगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने अरमार को फॉरेन टेररिस्ट बताया आैर ऑर्गेनाइजेन(एफटीओ) के लिए भर्ती करने वाला मुख्य रिक्रूटर और लीडर करार देते हुए आईएसआईएस का अंतरराष्ट्रीय आतंकी (एसडीजीटी) करार दिया है।
कौन है अरमार
भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय रहे मोहम्मद शफी अरमार जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया है वह कर्नाटक के भटकल का रहने वाला है। शफी अरमार आइएस में युवकों की भर्ती करता है और भारत से फरार है। अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2015 के पेरिस हमले और मार्च 2016 के ब्रुसेल्स हमले के कोआर्डिनेटर को भी प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका के स्टेट ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय आतंकियों पर विशेष रूप से तैयार सूची में अरमार का नाम भी शामिल कर दिया। छोटे मौला, अंजान भाई और यूसुफ अल-हिंदी जैसे कई उपनाम से विख्यात 30 वर्षीय अरमार के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस भी लंबित है।
भारत से पाकिस्तान भाग गया था अरमार
इंडियन मुजाहिदीन कैडरों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद अरमार अपने बड़े भाई के साथ पाकिस्तान भाग निकला। अरमार ने अंसार उल तौहिद नाम से संगठन बनाया जो बाद में आइएस से जुड़ गया।तकनीक का जानकार अरमार संपर्क के लिए फेसबुक एवं अन्य निजी मैसेंजर सर्विस का इस्तेमाल करता है। वह ब्रेनवाश कर भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका से युवकों को भर्ती करता है।
यासीन भटकल से पूछताछ में आया अरमार का नाम
वर्ष 2013 में नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार यासीन भटकल से पूछताछ में अरमार के आइएस से जुड़े होने की बात सामने आई थी। इससे पहले मध्य प्रदेश के रतलाम में आइएस के साथ जुड़े संदिग्धों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की जांच के दौरान पहली बार उसका नाम सामने आया था। आइएस संचालकों से पूछताछ में पता चला कि अरमार भारतीय युवकों को कट्टरपंथी बनाता है। वह युवकों को जुंड उल खलीफा-ए-हिंद में आनलाइन भर्ती किया करता था
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