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होशंगाबाद और बुधनी में अंधेरा होते ही नर्मदा का सीना छलनी कर रही पोकलेन

भोपाल। आज एक महीना पूरा हो गया जब नर्मदा नदी में रेत खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। नर्मदा में अवैध खनन की लगातार शिकायतों और सवालों के घेरे में आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 मई को ये घोषणा की थी। पिछले एक महीने में इस रोक का कितना असर हुआ और क्या नर्मदा में रेत खनन पूरी तरह बंद हो पाया? ये जानने के लिए नईदुनिया की टीम ने सीधे नर्मदा के घाटों का रुख किया और मौके से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की -
स्थान: होशंगाबाद के मालाखेड़ी स्थित बांद्राभान घाट।
रविवार रात 9 बजे
एक डंपर में सवार होकर नवदुनिया टीम सीधे खदान पहुंची। चारों तरफ स्याह अंधेरा और जेसीबी व डंपरों की आवाज। हालात साफ जाहिर कर रहे थे कि सब कुछ सामान्य नहीं है। हमें पहुंचे कुछ पल ही बीते थे और दो हट्टे कट्टे जवान ड्राइवर से सीधे सवाल करते हैं ये नया आदमी कौन है। दोनों के कमर में रिवाल्वर लटकी साफ दिखाई दे रही थी, उनके पूछताछ के तरीके से मालूम हो रहा था कि वे यहां के चप्पे चप्पे पर नजर रखने वाले हैं।
ड्राइवर ने भी बिना समय गंवाए पूरे विश्वास के साथ जवाब दिया भैया ने लगवाया है आज से गाड़ी पर चढ़ा है। पलटकर हिदायत भी मिली समझा देना किसी से कुछ भी न कहे। यह पूछताछ खदान पर आ रहे हर डंपर के स्टाफ से हो रही है। साढ़े दस बजने को हैं, इसी बीच एक डंपर पर पोकलेन मशीन आती है।
डंपर सीधे खदान में अंदर की ओर जाकर रुकता है। रेत के ढेर और पटियों के सहारे पोकलेन नीचे उतरती है और शुरू हो जाता है खनन पर लगी पाबंदी को तोड़ने का सिलसिला। जेसीबी से लाइन से खड़े डंपर भरते जा रहे हैं और रवाना भी हो रहे हैं।
रेत तो पहले की तरह ही निकल रही है
रात 11 बजे के करीब हमारे डंपर की बारी आ गई। खदान में मौजूद मजदूरों ने डंपर के पहुंचते ही पटिया और फर्रे टायरों के नीचे रख दिए, ताकि वजन से डंपर धंसे नहीं।
जेसीबी से करीब 400 घनमीटर रेत डंपर में भर दी गई। ड्राइवर ने पूरी सावधानी से डंपर खदान से बाहर निकाला और हम डंपर में सवार होकर मालाखेड़ी होते हुए वापस भोपाल तिराहे पर पहुंच गए। इस बीच हमने ड्राइवर और क्लीनर से रेत खनन को लेकर चर्चा भी की, उनका कहना था कि पाबंदी भले लगी है लेकिन खदान बंद नहीं हुआ है। बल्कि पहले से ज्यादा रेत निकाली जा रही है और हर दिन सैकड़ों ट्रक रेत निकल रही है। रेत निकालने वाले भी नए नहीं हैं, वही हैं जो पिछले कई सालों से रेत निकालते आ रहे हैं।
हां ये जरूर है कि पहले यहां खदान से बाहर निकलते ही ठेकेदार की कंपनी रायल्टी की पर्ची काटता था, जो अब नहीं कटती। डंपर से खदान पर ही पैसे ले लिए जाते हैं या मालिक से सीधे हिसाब हो जाता है। अब हम नर्मदा पुल पार कर बाएं ओर ग्वाड़ीगांव मोड़ के पहले रुके। यहां नर्मदा तट तक डंपर नहीं जाता। ड्राइवर ने बताया कि यहां खदान नहीं है लेकिन रेत का खनन होता है। हमने गांव से होकर आते संकरे रास्ते ट्रैक्टर ट्राली में रेत आते देखी।
ये ट्रालियां मुख्यमार्ग पर पेट्रोल पंप के पीछे खाली की जा रही हैं और यहीं डंपर भी भरे जा रहे हैं। बताया गया कि नर्मदा और तवा अवैध खनन कर यहां रेत का बड़े पैमाने पर स्टॉक किया जाता है और बाद में प्रशासन से स्टॉक की अनुमति ले ली जाती है। इससे कार्रवाई की स्थिति नहीं बनती। ड्राइवर ने बताया कि इसी तरह से जोशीपुर और बघवाड़ा से रेत निकाली जा रही है। दोनों जिलों की नर्मदा की खदानों से रोज रात को रेत के सैकड़ों डंपर भोपाल और आसपास के जिलों में जा रहे हैं।
नर्मदा से रेत खनन पर है प्रतिबंध
नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 मई को नर्मदा को बचाने के लिए रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।
नर्मदा का कटाव रोकने लगाया है प्रतिबंध
बेहिसाब रेत खनन से नर्मदा के तटों पर तेजी से कटाव बढ़ रहा है। मशीनों से रेत खनन होने के कारण नर्मदा उथली हो रही है और उसका तट क्षेत्र फैलता जा रहा है। इसे रोकने के लिए ही सरकार ने प्रतिबंध लगाया है।
प्रशासन की नजर में कहीं नहीं हो रहा अवैध खनन
सीहोर व होशंगाबाद के अधिकारियों से सीधी बात
सीहोर -जिला खनिज अधिकारी अशोक सिंघारे से सीधी बातचीत 
- प्रतिबंध के बाद भी नर्मदा में रेत का अवैध खनन क्यों हो रहा है?
- दो माह पहले अप्रेल में ही नर्मदा की सभी खदानों पर खनन पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद से किसी भी तरह का खनन नहीं हो रहा।
- हमारी टीम ने नर्मदा पुल के पास चरुआघाट के अलावा जोशीपुर और बघबाड़ा में भी रात में खनन होते पाया है?
- हम सतत पेट्रोलिंग करते हैं, पिछले दो माह में हमने अवैध खनन पर कार्रवाई भी की हैं, मशीनें, डंपर और रेत भी जब्त किए हैं।
- कार्रवाई में रेत जब्त हो रही है तो इसका मतलब खनन हो रहा है?
- चोरी छिपे कहीं खनन हो सकता है, लेकिन इस पर भी हम कार्रवाई कर रहे हैं।
- क्या सतत निगरानी की कोई व्यवस्था है?
- निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है, हमने चौकियां तैनात की हैं।
होशंगाबाद-होशंगाबाद एडीएम मनोज सरियाम से सीधी बातचीत 
- नर्मदा की बांद्राभान खदान से रेत का खनन पाबंदी के बाद भी हो रहा है?
- नर्मदा के अलावा अन्य खदानों पर भी रेत खनन पर रोक लगी हुई है, कहीं कोई खनन नहीं हो रहा है।
- नवदुनिया टीम ने खुद बांद्राभान में रात में खनन होते पाया है?
- हमारी नजर में कहीं कोई खनन नहीं हो रहा है, फिर आप जानकारी दे रहे हैं तो हम टीम भेजकर दिखवाएंगे।
- क्या प्रशासन ने निगरानी की कोई व्यवस्था की है?
- खनिज विभाग के अधिकारी और टीम सतत पेट्रोलिंग करती है, गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी हो रही है।
- प्रतिबंध लगने के बाद क्या कहीं गड़बड़ी पाई गई?
- बड़े स्तर पर कहीं खनन होते नहीं पाया गया, 2 जून को जरूर दो डंपर अवैध परिवहन करते पकड़े गए थे, जिन्हें जब्त किया गया था।
कलेक्टर करते हैं निगरानी
प्रदेश में नर्मदा नदी से रेत खनन पर 22 मई से प्रतिबंध है। प्रतिबंध के बाद रेत खनन हो रहा है या नहीं हो रहा है इस पर निगरानी कलेक्टर करते हैं। यदि कहीं कोई शिकायत या सूचना मिलती है तो उस पर कार्रवाई भी होती है। खदान से निकाली जा चुकी रेत की जानकारी शासन के पास है, उससे ज्यादा यदि निरीक्षण के दौरान निकाली जाना पाई जाती है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। 
मनोहर दुबे, सचिव खनिज विभाग, मप्र
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