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सरकार के आंसू आ गए, व्यापारियों ने प्याज से 140 करोड़ की चांदी काटी

जबलपुर। मालवा में प्याज की बंपर पैदवार हुई और अच्छी कीमत के लिए किसानों का आंदोलन करना पड़ा, लेकिन फायदा व्यापारियों ने उठाया। सरकार ने प्याज 8 रुपए प्रति किलो खरीदी पर आम जनता को सस्ती प्याज नहीं मिली।
प्याज की कुल कीमत जितनी सरकार ने किसानों को दी, उतना ही फायदा व्यापारियों ने प्याज बेचकर उठाया। सरकार ने सात दिनों में 2 लाख मीट्रिक टन (2 हजार लाख किलो) प्याज के लिए किसानों को 160 करोड़ रुपए चुकाए हैं, जबकि मंडी में आधे से भी कम दाम पर यही प्याज व्यापारियों ने खरीदे और आम जनता को 10 से 12 रुपए में बेचकर 140 करोड़ का फायदा लिया।
ऐसे व्यापारियों ने उठाया फायदा, सरकार को सीधे नुकसान
कुल प्याज खरीदी- 2 लाख मीट्रिक टन
सरकार को 140 करोड़ का नुकसान
8 रु. प्रति किलो के हिसाब से- 160 करोड़ रुपए
जिलों में प्याज परिवहन पर खर्च- 40 करोड़ रुपए
व्यापरियों को बेचे 3 रुपए किलो- 60 करोड़ रुपए
नुकसान हुआ- 140 करोड़ रुपए
व्यापारी का फायदा 
व्यापारियों ने सरकार से प्याज खरीदी- 60 करोड़ रुपए
खुदरा में प्याज लगभग 10 रुपए के हिसाब से- 200 करोड़
कुल फायदा- 140 करोड़ रुपए
ऐसे कमाई व्यापारियों ने फायदा
पहला चरण - पहले सरकार ने 8 रुपए किलो के हिसाब से किसानों से लिया गया।
दूसरा चरण - यही प्याज नीलामी में 3 से 4 रुपए में व्यापारी ने थोक में खरीदा।
तीसरा चरण - फिर फुटकर व्यापारियों ने यही प्याज 5 से 7 रुपए में खरीदा।
पांचवा चरण- फुटकर व्यापारी ने सब्जी मंडी और हाथ ठेले के जरिये 10 से 12 रुपए में बेचा।
व्यापारी के लिए नियम बदला, जनता के लिए नहीं 
सरकार ने प्याज खरीदने के बाद सभी कलेक्टरों को सरकारी राशन दुकानों से प्याज बेचने के निर्देश दिए थे। बीपीएल के लिए 2 रुपए प्रति किलो रेट रखा गया, लेकिन दुकानदारों ने बड़ी मात्रा में प्याज रखने की समस्या बताकर हाथ खड़े कर लिए। दूसरे ही दिन खुली बोली लगाकर प्रशासन ने प्याज मंडी में व्यापारियों को बेच दिया। सरकार से भी टेंडर निकालकर प्याज बेचने का निर्देश दे दिया। अगर सरकार चाहती तो पीडीएस के साथ-साथ आम जनता के लिए प्याज की ब्रिकी करा सकती थी, इससे आम जनता को फायदा मिलता।
विभाग नहीं बेच सकते नकद
नागरिक आपूर्ति निगम हो या सिविल सप्लाई कार्पोरेशन और चाहे मंडी प्रशासन कोई भी विभाग को ये अधिकार नहीं कि वो सरकारी प्याज ओपन मार्केट में नकद बेच सके। इसलिए नीलामी की प्रक्रिया को ही अपनाया जाता है। सरकार चाहती तो इस नियम को बदलकर खुदरा में प्याज मंडी से बेच सकती थी।
इनका कहना है
प्याज की खरीदी के लिए सरकार ने किसानों को 8 रुपए किलो के हिसाब से भुगतान किया है। ओपन मार्केट में सरकारी विभागों को नकद में बिक्री का अधिकार नहीं है। इसलिए नीलामी प्रक्रिया को अपनाया गया है। 
अक्षय सिंह, महाप्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम
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