अमेरिकी राजनीति में युवाओं की बढ़ती दिलचस्‍पी, ट्रंप के लिए खतरे की घंटी!

Monday, November 19, 2018

वाशिंगटन  । अमेरिका में हुए मध्‍यावधि चुनाव में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की प्रतिनिधि सभा में मिली करारी हार के बाद यहां के सियासी समीकरण बदल गए है। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में बड़ी जीत हासिल की और पब्लिकन पार्टी की करारी हार हुई । इसके साथ सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत बना लिया है। मध्‍यावधि चुनाव के पूर्व एक चुनावी सर्वेक्षण में इस बात की घोषणा की गई थी कि युवाओं के बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की दिलचस्‍पी घटी है। आइए, हम आपको बताते हैं इस सर्वे की कुछ खास बातें। इसके साथ कुछ माह पूर्व हुए सीएनएन की सर्वे रिपोर्ट की प्रमुख बातें। आदि-अादि।
1- मध्यावधि चुनाव से पूर्व एक मत सर्वेक्षण पर गौर करें तो उसकी भविष्‍यवाणी चुनावी नतीजों के काफी निकट है। हावर्ड विश्वविद्यालय के अंतर्गत केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में हुए चुनावी सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ था कि छह नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में मतदान में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस सर्वेक्षण में यह खुलासा किया गया था कि हाल के वर्षों में अमेरिकी युवाओं की चुनाव में दिलचस्‍पी बढ़ी है। सर्वे में दावा किया गया था कि चुनाव के अंतिम महीनों में युवा वोटरों के उत्साह में भारी वृद्धि हुई है।
2014 के मध्यावधि चुनाव के दौरान सिर्फ 26 फीसद युवाओं ने कहा था कि वे मतदान जरूर करेंगे। इस सर्वे में यह बात निकल कर आई थी कि 18 से 29 वर्ष के महज 26 फीसद मतदाता ही ट्रंप को पंसद करते हैं। यानी 74 फीसद युवा मतदाता ट्रंप को पंसद नहीं करते हैं। इसके अलावा वह शिक्षित श्वेत महिलाओं का भी समर्थन खो रहे हैं। इस वर्ग की ज्यादातर महिलाओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट दिया है। यह तस्‍वीर निश्चित रूप से ट्रंप के साथ रिपब्लिकन खेमे में खलबली मचाने वाली थी।
2- वाशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज ने छह नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले एक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की थी। इस सर्वे में पंजीकृत मतदाताओं ने हाउस के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारों की तुलना में डेमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवारों को तरजीह दी थी। इसके मुताबिक इस चुनाव में डेमोक्रेट को 50 फीसद और रिपब्लिकन को 43 फीसद वोट मिलने का दावा किया गया था। सर्वेक्षण में कहा गया था कि डेमोक्रेट के पास मतदाताओं के बीच 51 से 44 फीसद की बढ़त होगी।
अक्‍टूबर माह में सीएनएन की ओर से कराए गए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि 46 फीसद अमेरिकी ये मानते हैं कि अगले राष्ट्रपति चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत होगी। इस सर्वे के मुताबिक, ट्रंप के दोबारा चुनाव जीतने के सवाल पर लोगों के विचार अलग-अलग दिखे। 47 फीसद लोगों का मानना है कि ट्रंप दोबारा चुनाव नहीं जीतेंगे। मार्च में हुए सर्वे के बाद हुआ यह सर्वे ट्रंप के लिए बहुत बेहतर है। मार्च में 54 फीसद लोगों का मानना था कि ट्रंप अगले राष्ट्रपति चुनाव में हार जाएंगे। सर्वे में ये पाया गया था कि ट्रंप से मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी नेता और पूर्व उप राष्ट्रपति जो बिडन दावेदारी में आगे हैं।
इस सर्वे में डेमोक्रेट और डेमोक्रेट रुझान रखने वाले वोटरों से उनके पसंदीदा उम्मीदवार के बारे में पूछा गया था। उनके सामने 16 संभावित उम्मीदवारों के नाम रखे गए थे। इसमें बिडेन को सबसे ज्यादा 33 फीसद समर्थन मिला। उनके बाद 13 फीसद समर्थन के साथ वेरमोंट के निर्दलीय सीनेटर बर्नी सैंडर्स रहे। बता दें कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में सैंडर्स ने हिस्सा लिया था। भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को नौ फीसद और सीनेटर एलिजाबेथ वैरन को आठ फीसद लोगों का समर्थन मिला।
क्‍या है अमेरिकी कांग्रेस
बता दें कि यहां अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन है। पहले सदन को सीनेट और दूसरे सदन को हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स कहा जाता है। हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स को संसद का निचला सदन या प्रतिनिधि सभा भी कहते हैं। प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं। इस चुनाव में डेमोक्रेट ने 245 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। हालांकि सीनेट में  रिपब्लिकन पार्टी का वर्चस्व बरकरार है। सीनेट की 100 सीटों में पार्टी को 54 सीटें हासिल हुई हैं।
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देवास्वाम बोर्ड ने महिलाओं के प्रवेश के लिए कोर्ट से मांगा समय

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर अब भी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। सुप्रीम कोर्ट ने तो अपना फैसला सुना दिया, लेकिन राजनीति में सब कुछ इतना आसान नहीं होता। रविवार को थिरुवनंतपुरम स्थित मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन के आधिकारिक आवास पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। उधर केंद्रीय मंत्री अल्फोंस जोसेफ सोमवार को सबरीमाला पहुंचे। अल्फोंस सबरीमाला मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को दी जाने वाली सुविधाओं को जानना और समझना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री का मंदिर दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब 30 से ज्यादा श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया गया है।

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CBI रार: SC से निराश होकर लौटे अश्विनी कुमार, याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली । सीबीआइ की अंदरूनी घमासान का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर सीबाआइ के एक और वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि शीर्ष न्यायालय से उन्हें निराशा हाथ लगी। दरअसल, कोर्ट ने सीबीआइ अधिकारी अश्विनी कुमार गुप्ता की इंटेलिजेंस ब्यूरो को वापस भेजने की चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। 
मनीष कुमार सिन्हा भी SC पहुंचे 
वहीं, सीबीआइ के डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा ने भी अपने ट्रांसफर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मनीष कुमार सिन्हा का ट्रांसफर नागपुर किया गया है। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआइ के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआइआर पर एसआइटी जांच की मांग की है।
अश्विनी कुमार गुप्ता ने याचिका में कहा
बता दें कि CBI के वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों से उन्हें आइबी में वापस भेजने का आदेश जारी किया गया है। कुमार ने शीर्ष अदालत को बताया कि उन्हें उनके मूल संगठन आइबी में इस आधार पर वापस भेजा जा रहा है कि सीबीआइ को उनकी सेवा विस्तार का आदेश प्राप्त नहीं हुआ, जबकि सेवा विस्तार से संबंधित आइबी का अनापत्ति-पत्र उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने से पहले ही जून में सीबीआइ को प्राप्त हो गया था। इसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को मंजूरी के लिए अग्रसारित भी कर दिया गया था।
लिहाजा, उन्हें आइबी में वापस भेजने का 24 अक्टूबर का आदेश दुर्भावनापूर्ण और मामले की निष्पक्ष जांच में बाधा डालने के उद्देश्य से जारी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस आदेश का मकसद एक ईमानदार अधिकारी को परेशान और दंडित करने का भी है। याचिका में उन्होंने सीबीआइ प्रमुख आलोक वर्मा के सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति भी मांगी है।
अश्विनी कुमार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीआइ में इस समय विभिन्न पुलिस संगठनों के कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर हैं, जो प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के बावजूद जांच एजेंसी में बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जांच एजेंसी से इसलिए बाहर किया जा रहा है क्योंकि राकेश अस्थाना के खिलाफ 30 अगस्त, 2017 को दर्ज स्टर्लिंग बायोटेक मामले की जांच में वह एके बस्सी की मदद कर रहे थे और जांच में मिले कई सबूतों की वजह से अस्थाना इस मामले में फंस रहे थे। इसी वजह से एके बस्सी को भी पोर्ट ब्लेयर स्थानांतरित करके परेशान और दंडित किया गया है।
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राजस्थान विधानसभा चुनावः भाजपा ने सचिन पायलट के खिलाफ युनूस खान को मैदान में उतारा

जयपुर । कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को कड़ी टक्कर देने के लिए भाजपा ने टोंक विधानसभा क्षेत्र से अपने अधिकृत प्रत्याशी का टिकट बदल कर राज्य के परिवहन मंत्री युनूस खान को मैदान में उतार दिया है। टोक मुस्लिम बहुल सीट है। ऐसे में झालरापाटन में वसुंधरा राजे और मानवेंद्र सिंह के बाद टोक भी राजस्थान की हॉट सीट हो गई है, जहां कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के सामने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे खास मंत्री युनूस खान मैदान में होंगे। इसके साथ ही राजस्थान भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन सोमवार सुबह अपने प्रत्यशियों की आखिरी सूची भी जारी कर दी।
इस सूची में आठ नाम हैं। पार्टी ने टोंक में टिकट बदलने के साथ ही खेरवाड़ा सीट से भी प्रत्याशी बदला है। यहां शंकर लाल अहारी का टिकट बदल कर नानालाल अहारी को दिया गया है। इसके अलावा इस अंतिम सूची में एक और मंत्री पुत्र मोहित यादव को टिकट दिया गया है। मोहित यादव सरकार के श्रम मंत्री जवसंत यादव के बेटे है। उन्हें जवसंत यादव की जगह बहरोड से टिकट दिया गया है। पार्टी ने एक आइएएस अधिकारी ओपी सैनी को भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिला कर करौली से उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा केकड़ी से मौजूदा विधायक और संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम का टिकट काट कर राजेंद्र विनायका को टिकट दिया गया है।
आखिरी समय हुआ युनूस के टिकट का फैसला राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे नजदीकी मंत्रियों में गिने जाने वाले युनूस खान के टिकट का फैसला अंतिम समय में हुआ। वे राजस्थान में भाजपा के एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी बने हैं। यूनुस खान की परंपरागत सीट डीडवाना है, लेकिन टोंक से पायलट के मैदान में उतरने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदलते हुए उन्हें टोंक से उतारा है। टोंक में अल्पसंख्यक मतदाता बड़ी तादाद में है। टोंक से पार्टी पहले अजीत सिंह मेहता को अपनी पहली सूची में ही प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी। लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में उन्हें वहां से हटाकर यूनुस खान को आगे मैदान में उतारा गया है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कांग्रेस ने वसुंधरा राजे के सामने पूर्व रक्षा मंत्री जवसंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह को नहीं उतारा होता तो शायद टोंक में प्रत्याशी नहीं बदला जाता। हालांकि खुद मुख्यमंत्री राजे युनूस को टिकट देने के लिए अड़ी हुई थीं। ऐसे में जैसे ही राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं युनूस खान के टिकट के लिए रास्ता साफ हो गया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पायलट कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं। सचिन पायलट को घेरने के लिए यूनुस खान को भाजपा का ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। खुद कांग्रेस यहां से अब तक मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देती आई है। ऐसे में अब भाजपा की ओर से मुस्लिम प्रत्याशी आने से इस सीट का मुकाबला काफी रोचक हो गया है।
भाजपा की प्रत्याशियों की पांचवीं सूची में इन्हें मिला टिकट कोटपूतली से मुकेश गोयल 
बहरोड़ से मोहित यादव 
करौली से ओपी सैनी 
टोंक से यूनुस खान 
केकड़ी से राजेंद्र विनायका 
डीडवाना से जितेंद्र सिंह जोधा 
खींवसर से रामचंद्र उत्ता 
खेरवाड़ा से नानालाल अहारी 
- ये हैं राजस्थान में भाजपा के 200 प्रत्याशी
1- सादुलशहर - गुरवीर सिंहह बराड 
2- सूरतगढ़- रामप्रताप कासनिया 
3- रायसिंह नगर अजा- बलवीर सिंह 
4- हनुमानगढ- रामप्रताप 
5- पीलीबंगा - धर्मेंद्र मोची 
6- नोहर- अभिषेक मटोरिया 
7- भादरा- संजीव कुमार 
8- खाजूवाला - विश्वनाथ 
9- बीकानेर पूर्व- सिद्धी कुमारी 
10- कोलायत- पूनम कंवर 
11- लूणकरणसर- सुमीत गोदारा 
12- सादुलपुर - रामसिंह कस्वां 
13- सिरोही - ओटाराम 
14- आबू पिण्डवाडा- सामाराम गरासिया 
15- रेवदर- जगसीराम 
16- गोगुंदा अजजा- प्रतापलाल गमेती 
17- झाडोल - बाबूलाल खाडी 
18- खेरवाडा- नानालाल अहारी 
19- उदयपुर ग्रामीण- फूल सिंह मीणा 
20- उदयपुर- गुलाब चंद कटारिया 
21- मावली -धर्मनारायण जोशी 
22- सलूंबर - अमृत लाल 
23- धरियावाद - गौतमलाल 
24- डूंगरपुर - माधवलाल वराहत 
25- आसपुर -गोपीचंद मीणा 
26- सागवाडा -शंकर लााल डेचा 
27- चोरासी - सुशील कटारा 
28- घाटोल - हरेंद्र नीनामा 
29- बागीदौरा- खेमराज गरासिया 
30- कुशलगढ़ - भीभाभाई 
31- बेगूं- सुरेश धाकड़ 
32- चित्तौड़- चंद्रभान सिंह आक्या 
33-निम्बाहेड़ा- श्रीचंद्र कपलानी 
34- बडी सादड़ी- ललित ओसतवाल 
35- प्रतापगढ़ - हेमंत मीणा 
36- भीम - हरिसिंह रावत 
37-कुम्भलगढ़- सुरेंद्र सिंह राठौड़ 
38- राजसमंद - किरण माहेश्वरी 
39- भरतपुर- विजय बंसल 
40- नदबई- कृष्णेंद्र कौर दीपा 
41- वैर- रामस्वरूप कोली 
42- बयाना- रितु बनावत 
43- बाड़ी- जसवंत गुर्जर 
44- धौलपुर- शोभारानी कुशवाहा 
45- सपोटरा- गोलमा देवी 
46- लालसोट- रामविलास मीणा 
47- बामनवास- राजेंद्र मीणा 
48- खंडार- जितेंद्र गोठवाल 
49- मालपुरा- कन्हैया लाल चैधरी 
50- टोंक- युनूस खान 
51- देवली-उनियारा- राजेंद्र गुर्जर 
52- किशनगढ़- विकास चैधरी 
53- पुष्कर- सुरेश सिंह रावत 
54- अजमेर उत्तर-वासुदेव देवनानी 
55- अजमेर दक्षिण्ा- अनिता भदेल 
56- नसीराबाद- रामस्वरूप लाम्बा 
57- ब्यावर- शंकर सिंह रावत 
58- मसूदा- सुशील कंवर पलाड़ा 
59- लाडनूं- मनोहर सिंह 
60- जायल- मंजू बाघमार 
61- नागौर- मोहन राम चौधरी 
62- मेडता- भंवराराम रिठारिया 
63- डेगाना- अजय सिंह 
64- परबतसर- मानसिंह किनसरिया 
65- नावां- विजय सिंह चैधरी 
66- जैतारण- अविनाश गहलोत 
67- सोजत- शोभा चैहान 
68- पाली- ज्ञानचंद पारख 
69- मारवाड़ जंक्शन- केसाराम चैधरी 
70- बाली- पुष्पेंद्र सिंह 
71- फलौदी- पब्बाराम 
72- लोहावट- गजेंद्र सिंह खींवसर 
73- ओसियां- बेरा राम चैधरी 
74- भोपालगढ- कमसा मेघवाल 
75- सरदारपुरा- शंभुसिंह खेतासर 
76- जोधपुर- अतुल भंसाली 
77- सूरसागर- सूर्यकांता व्यास 
78- लूणी- जोगराम पटेल 
79- बिलाडा- अर्जुनलाल गर्ग 
80- बाड़मेर- कर्नल सोनाराम 
81- बायतु- कैलाश चौधरी 
82- पचपदरा- अमराराम 
83- सिवाना- हम्मीर सिंह भायल 
84- गुढामलानी- लादूराम विश्नोई 
85- आहोर- छगन सिंह राजपुरोहित 
86- जालौर- जोगेश्वर गर्ग 
87- भीनमाल- पूराराम चौधरी 
88- सांचैर- दानाराम चौधरी 
89- रानीवाड़ा- नारायण सिंह देवल 
90- मांडल- कालूलाल गुर्जर 
91- सहाडा- रूपलाल जाट 
92- भीलवाड़ा- विटठल शंकर अवस्थी 
93- शाहपुरा- कैलाश मेघवाल 
94- बूंदी- अशोक डोगरा 
95- सांगोद- हीरालाल नागर 
96- कोटा उत्तर- प्रहलाद गुंजल 
97- कोटा दक्षिण- संदीप शर्मा 
98- रामगंज मंडी- मदन दिलावर 
99- अंता- प्रभुलाल सैनी 
100- किशनगंज- ललित मीणा 
101- छबड़ा- प्रताप सिंह सिंघवी 
102- झालरापाटन- वसुंधरा राजे 
103- खानपुर- नरेंद्र नागर 
104- मनोहर थाना- गोविंद रानीपुरिया 
105- चुरू-राजेंद्र राठौड़ 
106- पिलानी- कैलाश मेघवाल 
107- सूरजगढ़- सुभाष पूनिया 
108- मंडावा- नरेंद्र कुमार 
109- उदयपुरवाटी- शुभकरण चैधरी 
110- खेतड़ी- धर्मपाल गुर्जर 
111- धोद- गोवर्धन वर्मा 
112- दातारामगढ़- हरीश चंद्र कुमावत 
113- खंडेला- बंशीधर 
114- नीमकाथाना- प्रेमा सिंह बाजौर 
115- श्रीमधोपुर- झाबर सिंह खर्रा 
116- विराटनगर- फूलचंद भिंडा 
117- शाहपुरा- राव राजेंद्र सिंह 
118- चैमू- रामलाल शर्मा 
119- फुलेरा- निर्मल कुमावत 
120- आमेर- सतीश पूनिया 
121- हवामहल- सुरेंद्र पारीक 
122- विद्याधर नगर- नरपत सिंह राजवी 
123- सिविल लाइंस- अरूण चतुर्वेदी 
124- किशनपोल- मोहनलाल गुप्ता 
125- आदर्श नगर- अशोक परनामी 
126- किशनगढ़बास- रामहेत सिंह यादव 
127- मुंडावर- मंजीत चौधरी 
128- अलवर शहर- संजय शर्मा 
129- नगर- अनीता सिंह गुर्जर 
130- डीग कुम्हेर- डॉ शैलेश सिंह 
131- शेरगढ़- बाबूसिंह राठौड़ 
132- श्रीगंगानगर- विनीता आहूजा 
133- अनूपगढ़- संतोष बावरी 
134- संगरिया- गुरदीप सिंह शाहपीणी 
135- बीकानेर पश्चिम- गोपाल जोशी 
136- डूंगरगढ़- ताराचंद सारस्वत 
137- नोखा- बिहारी लाल विश्नोई 
138- रतनगढ़- अमिनेश महर्षि 
139- सीकर- रतन जलधारी 
140- दूदू- प्रेमचंद बैरवा 
141- झोटवाड़ा- राजपाल सिंह शेखावत 
142- मालवीय नगर- कालीचरण सराफ 
143- बगरू- कैलाश वर्मा 
144- बस्सी- कन्हैया लाल मीणा 
145- बसेडी- छितरिया जाटव 
146- चाकसू- रामोतार बैरवा 
147-रामगढ़- सुखवंत सिंह 
148-कठूमर- बाबूलाल मैनेजर 
149-राजाखेड़ा- अशोक शर्मा 
150- हिंडौन- मंजू खेरवाल 
151- सिकराय- विक्रम बंशीवाल 
152- जैसलमेर- सांगसिंह भाटी 
153- पोकरण- प्रतापपुरी 
154- शिव- खुमाण सिंह 
155- चैहटन- आदूराम मेघवाल 
156- गढ़ी- कैलाश मीणा 
157- बांसवाड़ा- अखडू महिरा 
158- कपासन- अर्जुन जीनगर 
159- नाथद्वारा- महेश प्रताप सिंह 
160- जहाजपुर- गोपीचंद मीणा 
161- केशोराय पाटन- चंद्रकांता मेघवाल 
162-डग- कालू लाल मेघवाल 
163- तारानगर - राकेश जांगिड़ 
164- सरदारशहर - अशोक पींचा 
165- सुजानगढ़ - खेमाराम मेघवाल 
166- फतेहपुर - सुनीता जाखड़ 
167- नवलगढ़ - बनवारी लाल सैनी 
168- लक्ष्मणगढ़ - दिनेश जोशी 
169- सांगानेर - अशोक लाहोटी 
170- अलवर ग्रामीण - राम कृष्ण मेघवाल 
171- राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ - विजय मीणा 
172- कामा -जवाहर सिंह बेगम 
173- टोडाभीम- रमेश मीणा 
174- महुआ -राजेंद्र मीणा 
175- दौसा - शंकर शर्मा 
176- गंगापुर सिटी - मानसिंह गुर्जर 
177- मकराना - रूपा राम जाट 
178- सुमेरपुर - जोराराम कुमावत 
179- वल्लभनगर - उदय लाल डांगी 
180- आसींद - जबर सिंह सांखला 
181- मांडलगढ़ से गोपाल खंडेलवाल 
182- हिंडोली - ओमेंद्र सिंह हाडा 
183- बारां अटरू - बाबूलाल वर्मा 
184- लाडपुरा - कल्पना राजे 
185- पीपल्दा -ममता शर्मा 
186- झुंझुनूं से राजेंद्र भामू 
187- कोटपूतली - मुकेश गोयल 
188- बहरोड़ - मोहित यादव 
189- करौली - ओपी सैनी 
190- केकड़ी -राजेंद्र विनायका 
191- डीडवाना -जितेंद्र सिंह जोधा 
192- खींवसर -रामचंद्र उत्ता 
193- करणपुर- सुरेंद्रपाल सिंह टीटी 
194- थानागाजी- रोहिताश शर्मा 
195- जमवारामगढ़- महेंद्रपाल मीणा 
196- तिजारा- संदीप दायमा 
197- बानसूर- महेंद्र यादव 
198- बांदीकुई- रामकिशोर सैनी 
199- सवाई माधोपुर- आशा मीणा 
200- निवाई- रामसहाय।   


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जानें देश के लिए पहली बार ' Miss World' का खिताब जीतने वाली रीता की पूरी कहानी

Sunday, November 18, 2018

नई दिल्ली  । MISS WORLD और MISS UNIVERSE प्रतियोगिताओं जीतने के बाद इन विश्व सुंदरियों के लिए पूरी दुनिया करियर के शानदार दरवाजे खोल देती है। आपने हॉलिवुड-बॉलिवुड फिल्मों में बहुत सी विश्व सुंदरियों को काम करते देखा होगा और उनके बारे में जानते भी होंगे। इनकी पूरी जिंदगी चकाचौंध में गुजर जाती है, लेकिन हम यहां एक ऐसी विश्व सुंदरी की बात कर रहे, जो इस ग्लैमरस दुनिया को छोड़कर लंबे अर्से से गुमनामी में जीवन जी रही हैं।
हम बात कर रहे हैं 52 साल पहले भारत को MISS WORLD (विश्व सुंदरी) का पहला खिताब दिलाने वाली रीता फारिया की। भारत के साथ ही वह एशिया में भी विश्व सुंदरी का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला थीं। वह पहली ऐसी मिस वर्ल्ड रहीं जो पेशे से एक डॉक्टर (फिजीशियन) भी हैं। उन्होंने आज ही के दिन 17 नवंबर 1966 को भारत को दुनिया में ये सम्मान दिलाया था। उनके नक्शे कदम पर चलते हुए भारत को अब तक छह विश्व सुंदरी और दो ब्रह्मांड सुंदरी (MISS UNIVERSE) मिल चुकी हैं।
21 वर्ष की उम्र में जीता था खिताब
1945 में मुंबई में जन्मी रीता फारिया पॉवेल ने 17 नवंबर 1966 को जब मिस वर्ल्ड का खिताब जीता, वह महज 21 वर्ष की थीं। इससे पहले वह मिस मुंबई भी रह चुकी थीं। उनकी परवरिश गोवा के एक परिवार में हुई थी। उस वक्त वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहीं थीं। मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद उन्होंने करीब एक साल तक मॉडलिंग की। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग को अलविदा कह दिया। वर्ष 1998 में उन्होंने फैशन की दुनिया में दोबारा कदम रखा और फेमिना मिस इंडिया की जज भी बनीं। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भी वह बतौर जज शामिल हो चुकी हैं।

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अमेरिका में 16 साल के लड़के ने 61 वर्षीय भारतीय बुजुर्ग को गोलियों से भूना, मौत

न्यूयार्क, प्रेट्र। अमेरिकी राज्य न्यूजर्सी में एक 61 वर्षीय भारतीय को 16 साल के एक लड़के ने गोलियों से भून दिया। एटलांटिक सिटी की प्रेस के मुताबिक सुनील एडला नाम का यह शख्स इसी महीने के 27 तारीख को अपनी मां का 95वां जन्मदिन और क्रिसमस मनाने भारत आने वाला था। लेकिन उससे पहले ही उसे बड़ी बेरहमी से वेंटनोर स्थित उसके घर के बाहर उसे गोलियों से भून दिया गया।
एटलांटिक सिटी के एक चर्च सर्विस में पियानो बजाने के लिए विख्यात सुनील की दो संतानें हैं और एक पोता भी है। एटलांटिक काउंटी में पिछले तीस बरसों से रह रहे थे। मेडिकल जांच में पता चला है कि उन्हें कई गोलियों के घाव लगे हैं।
उनके नाबालिग हत्यारे का नाम उसकी उम्र के चलते जाहिर नहीं किया गया है। लेकिन स्थानीय पुलिस ने उसे एग हार्बर सिटी से गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या का कारण भी अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय की हत्या उनकी कार छीनने के लिए की की गई। आरोपित पर हत्या, लूटपाट, कार छीनने और गैर कानूनी तरीके से हैंड गन रखने का मामला दर्ज किया गया है।

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CG Chunav 2018: चुनाव चिह्न के चक्रव्यूह में फंसा जोगी का राजनीतिक वजूद

बिलासपुर  । आप इसे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के प्रति जनता का प्रेम कह लें या उनके डर का प्रभाव, पूरे मरवाही विधानसभा क्षेत्र में घूम लीजिए उनके खिलाफ खुलकर बोलने वाले नहीं मिलेंगे। ऐसा नहीं है कि मरवाही में विकास की गंगा बह रही है।
इस आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्र में तमाम तरह की समस्याएं हैं। सड़कें खराब हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। डॉक्टरों एवं आधारभूत संरचना के अभाव में अस्पताल रेफर सेंटर बन गए हैं। कृषि को छोड़ रोजगार के कोई व्यवस्थित साधन नहीं है। सिंचाई की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कृषि भी प्रकृति पर निर्भर है।
बावजूद जोगी परिवार का मरवाही विधानसभा क्षेत्र पर 18 वर्षों से कब्जा है। जोगी एक बार फिर मरवाही के अखाड़े में अपना भाग्य आजमाने उतरे हैं लेकिन अपने ही बनाए चक्रव्यूह में फंस गए हैं। वे चक्रव्यूह भेद पाते हैं या नहीं यह तो 11 दिसंबर को मतगणना के दौरान ही पता चलेगा।
बिलासपुर-पेंड्रा-मनेंद्रगढ़ मुख्य मार्ग पर कारीआम से छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश की सीमा भेड़वा नाला तक सड़क के दोनों किनारे स्थित दुकान-मकान गुलाबी झंडे से पटे पड़े हैं। यह गुलाबी झंडा अजीत जोगी द्वारा बनाई गई पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का है। बैनर और झंडों के जोर को देखकर कहा जा सकता है कि यहां भाजपा और कांग्रेस पर जोगी भारी हैं। लेकिन, हकीकत में ऐसा है नहीं।
भाजपा की प्रत्याशी अर्चना पोर्ते और कांग्रेस प्रत्याशी गुलाब सिंह राज को कम आंकना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए कि कांग्रेस छोड़ खुद की पार्टी जकांछ बनाकर चुनावी मैदान में 'हल जोतता हुआ किसान' चुनाव चिन्ह गांव-देहात के मतदाताओं तक पहुंचाना जोगी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य सृजन के बाद राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने जोगी कांग्रेस से मरवाही विधानसभा उप चुनाव-2001 जीतकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में पहुंचे। उन्होंने मरवाही से कांग्रेस के टिकट पर 2003 और 2008 में विधानसभा चुनाव जीता। 2013 में जोगी ने चुनाव नहीं लड़ा। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर अपने बेटे अमित जोगी को मरवाही के मैदान में उतारा। अमित ने कब्जा बरकरार रखा।
सीधे कहें तो मरवाही के मतदाताओं और कांग्रेस के बीच मोहब्बत रही है। यह मोहब्बत ही अजीत जोगी के लिए चक्रव्यूह बन गया है। 1972 में मरवाही विधानसभा के अस्तित्व में आने के बाद से 2013 तक हुए 11 विधानसभा चुनाव में अपवाद स्वरूप सिर्फ दो बार 1990 और 1998 में भाजपा की जीत हुई है। इस क्षेत्र के सुदूर आदिवासी अंचल के मतदाता जोगी के साथ-साथ कांग्रेस के चुनाव चिन्ह हाथ को जानते और पहचानते हैं। इनके बीच जोगी अगर अपना चुनाव चिन्ह पहुंचा सके तो ठीक नहीं तो मरवाही में इनकी राजनीति की कहानी खत्म हो सकती है।
पतगंवा में सड़क के किनारे अपने घर के सामने बैठे बुजुर्ग पूरण दास कहते हैं-जोगी जब मुख्यमंत्री रहिस तो ठीक काम करे रहिस तउन से ऊजीतत रहिस। ऐही कारण से ओखर लड़का का भी जीता दिहिन। लेकिन, इस बार देखे क पड़ही। मरवाही में बकरी एवं गाय को चराने वाले हर तरफ दिख जाते हैं। उन्हें झुंड में अपनी बकरियों और गायों की संख्या दूर से ही गिन लेने की महारत हासिल है लेकिन अबकी किसकी जीत होगी, के सवाल पर चुप्पी साध लेते हैं। कोटा के जंगल में बकरी चरा रहे गोपाल सिंह एवं उनके साथी बाल सिंह ने बहुत जोर देने पर कहा कि अबकी मुकाबला कमल और पंजा छाप के बीच लगता है।
गौरेला के वार रूम से जोगी लड़ रहे लड़ाई
अजीत जोगी खुद मारवाही से चुनाव लड़ने के साथ-साथ अपनी पत्नी रेणु जोगी को बगल की सीट कोटा से लड़ा रहे हैं। जबकि पुत्रवधू ऋचा जोगी को अकलतरा से बसपा के टिकट पर चुूनाव लड़ा रहे हैं। इसके साथ ही उनके कंधे जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने की भी जिम्मेवारी है। उन्होंने मरवाही विधानसभा क्षेत्र के गौरेला को वाररूम बना रखा है। जोगी दिन के 11-12 बजे तक गौरेला में रहते हैं। फिर हेलिकॉप्टर से राज्य के दूसरे क्षेत्रों में प्रचार के लिए उड़ जाते हैं और शाम को चार-पांच बजे वापस गौरेला में लैंड करते हैं।
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MP Election 2018: इंदौर जिले के 725 बूथों पर महिलाएं कराएंगी मतदान

इंदौर  । आधी आबादी के मन से चुनाव कराने का डर बाहर निकालने और चुनाव को सरल-सुगम बनाने के लिए विधानसभा चुनाव में इस बार भारत निर्वाचन आयोग 'लेडीज फर्स्ट" की राह पर चल रहा है। जिले में लगभग 725 ऐसे मतदान केंद्र चिन्हित किए गए हैं जिनकी कमान महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ रहेगी। यहां पीठासीन अधिकारी से लेकर मतदान अधिकारी-1, 2 और 3 और बीएलओ सभी महिलाएं होंगी। पूरे प्रदेश में इन महिला केंद्रित मतदान केंद्रों की सर्वाधिक संख्या इंदौर जिले में है।
इन बूथों को ऑल वुमन पोलिंग बूथ नाम दिया गया है। साथ ही आधी महिलाएं और आधे पुस्र्ष कर्मचारियों वाली पोलिंग पार्टी भी बनाई गई हैं जिन्हें हाईब्रिड बूथ नाम दिया गया है। इंदौर में हाईब्रिड बूथ की संख्या भी 466 है जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इंदौर में इतनी बड़ी तादाद में महिला बूथ बनाने का कारण यह भी है कि यहां शासकीय विभागों और दफ्तरों में महिला अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है।
आयोग की यह कवायद महिला कर्मचारियों के मन से चुनाव का डर निकालने और उन्हें लोकतंत्र में अधिक से अधिक भागीदार बनाने के लिए की जा रही है। इन पोलिंग बूथों पर वोट डालने आने वाले मतदाताओं में महिला मतदाताओं को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि वे पहले वोट डालकर घर जा सकें। यही नहीं, मतदान केंद्र पर स्तनपान कक्ष भी बनाया जाएगा। अपने दुधमुंहे बच्चों को साथ लेकर वोट डालने आने वाली महिलाएं इस कक्ष में बैठकर स्तनपान करा सकेंगी।
कोशिश यहां तक है कि इन मतदान केंद्रों पर सुरक्षा अधिकारी व कर्मचारी भी महिलाओं को ही तैनात किया जाए, हालांकि यह उपलब्ध फोर्स को देखते हुए तय किया जाएगा। निर्वाचन की जिम्मेदारी देख रही अपर कलेक्टर निधि निवेदिता के मुताबिक महिला कर्मचारियों के लिहाज से यह बहुत सकारात्मक प्रयोग है। इससे महिलाओं को चुनाव कराने में सुगमता होगी।
इसलिए यह प्रयोग कर रहा चुनाव आयोग
- मतदान केंद्रों पर पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले पहुंचना पड़ता है। मतदान केंद्र पर ही रात रुककर इंतजाम करना पड़ते हैं। इसमें ईवीएम पीठासीन अधिकारी की कस्टडी में रहती है, इसलिए मतदान केंद्र पर उनका रात रुकना अनिवार्य होता है।
- यदि महिला पीठासीन अधिकारी के साथ पी-1, पी-2 और पी-3 पुस्र्ष हों तो उनके साथ मतदान केंद्र पर एक दिन पहले पहुंचकर रात रुकने में असहज महसूस करती हैं। ऐसा महिलाओं से संबंधित सुविधाओं की कमी और सुरक्षा कारणों से भी होता है।
- पी-1, पी-2 या पी-3 सुविधा अनुसार मतदान केंद्र पर रात स्र्कना जरूरी नहीं, इसलिए इन पदों पर नियुक्त महिला अधिकारी या कर्मचारी घर जा सकती हैं। हाईब्रिड बूथ इसलिए भी बनाए गए हैं।
- पोलिंग पार्टी में सभी महिलाएं होंगी तो वे साथ रहने में सहज महसूस करेंगी। ऐसे केंद्रों पर बाथरूम, शौचालय, भोजन आदि सुविधाएं महिलाओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।
मतदान केंद्रों की तीन श्रेणी
- पहले वे मतदान केंद्र जहां पोलिंग पार्टी के सभी सदस्य पुस्र्ष होंगे।
 दूसरे वे मतदान केंद्र जहां पोलिंग पार्टी के सदस्यों में आधी महिलाएं होंगी। ऐसे बूथों को हाईब्रिड बूथ नाम दिया गया है।
- तीसरे वे मतदान केंद्र जिसमें सभी महिलाएं होंगी। इन बूथों को ऑल वुमन पोलिंग बूथ नाम दिया गया है।
फैक्ट फाइल
ऑल वुमन पोलिंग बूथ
जिला            बूथ
इंदौर              725
उज्जैन           390
देवास            175
रतलाम          100
झाबुआ            55
मंदसौर            20
खंडवा             16
धार                13
नीमच             15
बड़वानी           18
खरगोन             9
आलीराजपुर       2
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